Big Breaking : केन्द्र में मोदी सरकार के 100 महीने, क्या 22 फ़रवरी 2025 को टूटेगा बसु का ‘रिकॉर्ड’ ?

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नेहरू, इंदिरा, मनमोहन, वाजपेयी के बाद सबसे लम्बा शासन

सबसे लम्बे समय तक ‘सत्ता’ में रहने के बसु के रिकॉर्ड से ढाई वर्ष दूर

बसु ने 8539 दिनों तक किया था पश्चिम बंगाल में शासन

मोदी ने गुजरात व केन्द्र की सत्ता में पूरे किए 7659 दिन

मोदी को बसु का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए जीतना होगा 2024 का चुनाव

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

गांधीनगर, 26 सितंबर 2022 : विश्व मंच, वैश्विक कूटनीति, भारतीय राजनीति और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा-BJP) जैसी सभी धुरियों के सबसे बड़े केन्द्रबिन्दु यानी नरेन्द्र मोदी ने 26 सितंबर 2022 सोमवार को एक और इतिहास रच दिया है। गुजरात में मेहसाणा ज़िले के छोटे से स्थान वडनगर में 17 सितंबर 1950 को पनपा नरेन्द्र नामक बीज आज देश और दुनिया में मोदी नामक विशाल वटवृक्ष बन चुका है और इसकी छाया हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर रही है, तो पूरा विश्व इस छाया में आशा की किरणें देख रहा है।

जी हाँ, 26 सितंबर 2022 की तिथि भारतीय राजनीति के इतिहास में एक नया मोड़ लेकर आई है, क्योंकि वर्ष 2014 में 30 वर्षों के बाद पूर्ण बहुमत प्राप्त करके प्रधानमंत्री बने नरेन्द्र मोदी के केन्द्र में शासन को 100 महीने पूर्ण हो गए। ठीक 100 महीने पहले मोदी ने 26 मई, 2014 के देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। गत 26 मई, 2022 को केन्द्र में सत्ता के 8 वर्ष पूर्ण करने वाले मोदी ने अब 26 सितंबर 2022 सोमवार को क्रिकेट से लेकर सत्ता की राजनीति सहित हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण अंक यानी 100 महीने का कार्यकाल पूरा किया है।

क्यों है महत्वपूर्ण है 26 सितंबर 2022 ?

मोदी सरकार के 8 वर्ष का महत्व अपने स्थान पर है, परंतु यह नहीं भूलना चाहिए कि 100 यानी शताब्दी का अंक एक अलग ही और विशेष महत्व रखता है। क्रिकेट जैसे खेल में 50 रनों का महत्व है, तो 51 से 99 रनों का भी महत्व है, परंतु 99 रनों में 1 रन का जुड़ना किसी खिलाड़ी को अति महत्वपूर्ण बना देता है, क्योंकि इस 1 रन के जुड़ते ही खिलाड़ी अपना शतक जड़ देता है।

ठीक इसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब सत्ता के 8 वर्ष पूरे किए, तब महीनों के शतक से वे 4 अंक दूर थे और 26 सितंबर 2022 सोमवार को उन्होंने सत्ता में महीनों का शतक जड़ कर अपने कार्यकाल को अति महत्वपूर्ण बना दिया है।

पहले अपने ही दल भारतीय जनता पार्टी के अंतर्विरोधों तथा धुरविरोधी विपक्षी दलों की भीषण घृणित राजनीति जैसी चुनौतियों का सामना करके 26 मई, 2014 को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले नरेन्द्र मोदी ने जब 30 वर्षों का बहुमत वाला रिकॉर्ड बनाया, तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि मोदी लोकसभा चुनाव 2019 में और भी भारी बहुमत से जीतेंगे और दोबारा सत्ता में आएंगे, लेकिन न केवल ऐसा हुआ; बल्कि आज नरेन्द्र मोदी केन्द्र में सबसे लम्बे समय तक सत्ता में रहने वाले पाँचवें प्रधानमंत्री बन गए हैं।

15 अगस्त, 1947 को स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कांग्रेस नेता पंडित जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री बने और 1964 तक यानी 16 वर्ष 286 दिन सत्ता में रहे। इसके बाद उनकी पुत्री व कांग्रेस नेता इंदिरा गांधी ने देश पर 15 वर्ष 350 दिन शासन किया। इंदिरा ने पहले 1967 से 1977 और फिर 1980 से 1984 तक कुल चार कार्यकालों में दूसरे सबसे लंबे शासक का रिकॉर्ड बनाया। इंदिरा के बाद तीसरे स्थान पर भी कांग्रेस नेता डॉ. मनमोहन सिंह रहे, जिन्होंने वर्ष 2004 से 2014 यानी दो कार्यकालों में 10 वर्ष 4 दिनों तक शासन किया।

सबसे लम्बे समय तक शासन के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चौथे स्थान पर हैं, जो वर्ष 2014 से सत्ता में हैं। मोदी ने दो कार्यकालों में 8 वर्ष 4 महीने यानी 26 सितंबर 2022 को 100 महीने यानी 3046 दिन पूरे किए हैं।

कांग्रेसेतर प्रधानमंत्रियों में मोदी शीर्ष पर

देश में सबसे लम्बे समय तक शासन करने वालों में नरेन्द्र मोदी भले ही चौथे स्थान पर हों, परंतु कांग्रेसेतर यानी नॉन-कांग्रेस सरकारों के मामले में शीर्ष पर हैं। कांग्रेसेतर प्रधानमंत्रियों में एकमात्र अटल बिहारी वाजपेयी ने 1996, 1998 में और फिर 1999 से 2004 तक यानी तीन कार्यकालों में 6 वर्ष 80 दिनों तक शासन किया था, जबकि मोदी अपने ही दल के नेता का रिकॉर्ड दो वर्ष पहले ही तोड़ चुके हैं। वाजपेयी ने 2 वर्ष 186 दिन शासन करने वाले मोरारजी देसाई का रिकॉर्ड तोड़ा था।

बसु हैं सबसे लम्बे शासन के बॉस

देश में जब-जब सबसे लम्बे शासन के रिकॉर्ड की बात आती है, तब-तब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता ज्योति बसु को याद किया जाता है। बसु ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में 1977 से 2000 तक चार कार्यकालों में 23 वर्ष 137 दिन यानी कुल 8539 दिनों तक एकछत्र शासन किया था। बसु के सबसे लम्बे शासन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि उन्होंने चौथी बार चुनाव जीतने के बाद पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा करने से पहले यानी चार वर्ष में ही मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया। इस प्रकार कहा जा सकता है कि बसु ने सबसे लम्बे शासन का ‘अजेय’ रिकॉर्ड बनाया है, जिसे आज तक कोई नहीं तोड़ सका है।

2024 की विजय मोदी को बना सकती है बसु का ‘बॉस’

हाँ, एक राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में सबसे लम्बे शासन का बसु का रिकॉर्ड वर्तमान में किसी राज्य के मुख्यमंत्री के लिए तोड़ पाना बहुत ही मुश्किल लगता है, क्योंकि जनता की जागृति एवं राजनीतिक दलों की जोड़-तोड़ किसी एक दल या नेता को इतने लम्बे समय तक मुख्यमंत्री के पद पर शायद ही रहने देगी।

यद्यपि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के पास बसु के रिकॉर्ड को तकनीकी रूप से तथा बसु से भी अधिक महत्वपूर्ण ढंग से तोड़ने का विकल्प है। बसु ने केवल एक राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में सबसे लम्बे शासन का रिकॉर्ड बनाया है, परंतु मोदी बसु के इस रिकॉर्ड को दोहरे प्रभाव के साथ तोड़ सकते हैं।

नरेन्द्र मोदी 7 अक्टूबर 2001 से आज तक ‘सत्ता’ में हैं और 26 सितंबर सोमवार को उनके सत्ता में लगभग 21 वर्ष यानी 7660 दिन पूरे हुए हैं। बसु केवल पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे, जबकि मोदी पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सबसे लम्बे शासन का रिकॉर्ड बना चुके हैं और पिछले 100 महीनों से देश के प्रधानमंत्री हैं। मोदी ने गुजरात में तीन कार्यकालों में 7 अक्टूबर, 2001 से 22 मई, 2014 तक यानी 12 वर्ष से अधिक 4611 दिनों तक शासन किया। गुजरात में यह सबसे लम्बे शासन का मोदी का रिकॉर्ड है।

तकनीकी रूप से देखा जाए, तो मोदी 7 अक्टूबर, 2001 से गुजरात और 26 मई 2014 से भारत की सत्ता में हैं और 26 सितंबर 2022 को उन्होंने शासन के 100 महीने यानी 3046 दिन पूरे किए हैं। यदि सबसे लम्बे शासन के दिनों पर ध्यान दिया जाए, तो एकमात्र मोदी ही बसु के रिकॉर्ड के सबसे निकट हैं। बसु पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में सबसे लम्बे समय यानी 8539 दिनों तक कार्यरत रहे, जबकि मोदी के सत्ता में रहने के कार्यकाल की गणना गुजरात से आरंभ करके केन्द्र तक की जाए, तो स्पष्ट हो जाता है कि मोदी पाँच कार्यकालों में 7 अक्टूबर 2001 से 26 सितंबर 2022 सत्ता में कुल 7659 दिन पूरे कर चुके हैं। अब मोदी को यदि तकनीकी रूप से और बसु से भी अधिक प्रभावी ढंग से बसु का रिकॉर्ड तोड़ना है, तो उन्हें 22 फ़रवरी 2025 तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहना होगा।

मोदी कैसे तोड़ सकते हैं बसु का रिकॉर्ड ?

मोदी के लिए बसु का रिकॉर्ड तोड़ना सीधा-सीधा कार्य नहीं है, क्योंकि 22 फ़रवरी 2025 का दिन आने से पहले लोकसभा चुनाव 2024 आएगा। स्पष्ट है कि मोदी 22 फ़रवरी 2025 को तभी सत्ता में रह सकते हैं, जब वे अप्रैल-मई 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में तीसरी बार बहुमत प्राप्त करें और प्रधानमंत्री बनें। कुल मिला कर लोकसभा चुनाव 2024 की चुनावी जीत ही मोदी को सबसे लंबे शासन के रिकॉर्ड के मामले में बसु का बॉस बना सकती है।