गुजरात में चमत्कार : आकाश का जल ‘आकाश’ तक पहुँचाया, ‘एस्टोल’ में साकार हुई अद्भुत वॉटर इंजीनियरिंग कुशलता

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1837 फ़ीट ऊँचाई पर बसे 4.50 लाख लोगों को मिलेगा शुद्ध पेयजल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 10 जून को करेंगे एस्टोल समूह जलापूर्ति योजना का लोकार्पण

गांधीनगर, 8 जून 2022 (बीबीएन)। गुजरात में पिछले 4 वर्षों से एस्टोल प्रोजेक्ट चर्चा में रहा है। एस्टोल किसी कम्पनी का नाम नहीं है, बल्कि एक गाँव का नाम है। यह एस्टोल गाँव अब गुजरात की अद्भुत जल अभियांत्रिकी कुशलता का साक्षी स्थल बना है। वलसाड ज़िले की कपराडा तहसील में स्थित एस्टोल गाँव के नाम पर बनी एस्टोल समूह जलापूर्ति योजना अप्रैल-2018 में प्रारंभ हुई थी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस योजना का शिलान्यास किया था और अब प्रधानमंत्री ही आगामी 10 जून शुक्रवार को इस योजना का लोकार्पण करने जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 10 जून को गुजरात के दौरे पर हैं और अपनी इस यात्रा के दौरान वे कई बड़ी परियोजनाएँ गुजरात की जनता को समर्पित करेंगे। इनमें एस्टोल प्रोजेक्ट का उद्घाटन भी शामिल है।
राज्य सरकार का कहना है कि एस्टोल परियोजना वलसाड ज़िले के दूरदराज़ी पहाड़ी व आदिवासी क्षेत्र के 174 गाँवों और 1028 हेमलेट्स (मुख्य गाँव से दूर 10-15 घरों के समूह वाले क्षेत्र, जिन्हें गुजराती में फळिया कहते हैं) में रहने वाले 4.50 लाख लोगों के जीवन में एक नया बदलाव लेकर आएगी।

गुजरात सरकार की इस महत्वपूर्ण परियोजना के संदर्भ में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने कहा, “वलसाड ज़िले के धरमपुर और कपराडा क्षेत्र में एस्टोल प्रोजेक्ट को पूरा करना हमारे लिए एक बड़ी चुनौती था, परंतु मुझे आनंद है कि हमारे इंजीनियर्स ने सभी चुनौतियों को पार करते हुए इसे पूरा कर लिया है। इंजीनियरिंग के दृष्टिकोण से भी एस्टोल प्रोजेक्ट एक बड़ी चामत्कारिक उपलब्धि है, क्योंकि इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत लगभग 200 मंज़िल (1875 फ़ीट) की ऊँचाई तक पानी का उद्वहन कर इस पहाड़ी क्षेत्र में जल वितरण को हमने संभव बनाया है। माननीय प्रधानमंत्री द्वारा इसके उद्घाटन के बाद धरमपुर और कपराडा क्षेत्र के 174 गाँवों में रहने वाले 4.50 लाख लोगों का जीवन पूरी तरह से बदल जाएगा।”

गुजरात के लिए क्यों विशेष है एस्टोल प्रोजेक्ट ?

आदिवासी क्षेत्र धरमपुर और कपराडा की भौगोलिक संरचना ऐसी है कि वहाँ न वर्षा जल संचय हो पाता है और न ही भूमिगत जल की स्थिति अच्छी है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि वहाँ की अधिकतर भूमि पथरीली है और इस कारण वर्षा ऋतु में यहाँ स्थित जलाशयों में पानी तो भर जाता है, परंतु वह पानी ज़मीन के नीचे नहीं जा पाता। इस कारण वर्षा ऋतु के कुछ महीनों बाद ही यहाँ के जलाशय पूरी तरह से सूख जाते हैं। राज्य सरकार ने इन पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक प्रतिदिन पीने का पानी पहुँचाने के उद्देश्य के साथ वर्ष 2018 में 586.16 करोड़ रुपए की लागत से इस एस्टोल प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया था।

क्या है एस्टोल प्रोजेक्ट ?

• मधुबन बांध (वॉटर होल्डिंग ग्रॉस कैपेसिटी 567 मिलियन क़्यूबिक मीटर) के पानी को पम्पिंग स्टेशन्स से ऊपर उठाकर (Lift Technique) लोगों के घरों तक पानी पहुँचाना की योजना है
• इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत 28 पम्पिंग स्टेशन्स स्थापित किए गए, जिनकी क्षमता 8 मेगावॉट वोल्ट एम्पियर (MVA) है। ये पम्पिंग स्टेशन प्रतिदिन लगभग 7.5 करोड़ लीटर पीने का पानी 4.50 लाख लोगों तक पहुँचाएंगे।
• इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत छोटी-छोटी बस्तियों तक पानी पहुँचाने के लिए 81 किलोमीटर की पम्पिंग लाइन, 855 किलोमीटर की डिस्ट्रीब्यूशन लाइन और 340 किलोमीटर लम्बी पाइपलाइन बिछाई गई
• शुद्ध पेयजल की उपलब्धता के लिए दो फ़िल्टर प्लाण्ट (प्रत्येक की क्षमता 3.3 करोड़ लीटर पानी प्रतिदिन) की स्थापना, जिसकी कुल क्षमता 6.6 करोड़ लीटर पानी प्रतिदिन है।
• पानी को स्टोर करने के लिए इन क्षेत्रों में 6 ऊँची टंकियों (0.47 करोड़ लीटर की क्षमता), 28 अंडर ग्राउंड टंकियों (7.7 करोड़ लीटर की क्षमता) और गाँवों व बस्तियों में 1202 भूतल टंकियों (4.4 करोड़ लीटर की क्षमता) का निर्माण किया गया है।

पाइपलाइन को बिछाने में भी किया गया है विशेष तकनीक का उपयोग
• यहाँ ज़मीन की संरचना के अनुसार ही पाइपें बिछाई गई हैं, जो कहीं पर ऊँची, तो कहीं पर नीची हैं।
• इस कारण इन पाइपों में कुछ-कुछ स्थानों पानी का दबाव सामान्य है, तो कुछ स्थानों में सामान्य की तुलना में बहुत अधिक (40 प्रति किलोग्राम सेंटीमीटर स्क़्वेयर) है। यह दबाव इतना अधिक है कि पाइपलाइनों को बहुत अधिक नुक़सान पहुँचा सकता है
• इस समस्या के समाधान के रूप में मुख्य पाइप के अंदर 12 मिलीमीटर मोटाई की माइल्ड स्टील पाइप का उपयोग किया है, ताकि मुख्य पाइप को फटने से बचाया जा सके।

वॉटर अभियंत्रिकी के क्षेत्र में एक बड़ा चमत्कार है एस्टोल प्रोजेक्ट

गुजरात सरकार का एस्टोल प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग के दृष्टिकोण से किसी चमत्कार से कम नहीं है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत मधुबन बांध के पानी को लगभग 200 मंज़िला की उँचाई तक ऊपर उठा कर (Lift Technique) धरमपुर के 50 गाँवों और कपराडा के 124 गाँवों (कुल 174 गाँवों) तक पहुँचाया जाएगा। यह पहली बार होगा, जब मधुबन बांध के पानी को पीने के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। इससे पहले इस बांध के पानी का उपयोग सिंचाई के लिए ही किया जाता था। यद्यपि एस्टोलप्रोजेक्ट के बाद भी इस बांध के पानी का पीने के उपयोग के साथ सिंचाई के लिए भी पहले की तरह ही उपयोग किया जाता रहेगा।