कोरोना काल में सैकड़ों लोगों को साँसें दे रहे संजय राय शेरपुरिया

0
175

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 17 जून (बीबीएन)। सामाजिक उद्यमी (Social Entrepreneur) संजय राय शेरपुरिया यूँ तो किसी तारीफ़ के मोहताज़ नहीं हैं। कालांतर में भी उनकी जनसेवा और अपने लोगों के लिए उनकी प्रतिबद्धता की ख़बरें आती रही हैं, मगर इस बार जब समूचा भारत एक अदृश्य शत्रु कोरोना (CORONA) के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहा है, तब संजय राय ने जनसरोकार के कार्यों में कोई कमी नहीं छोड़ी और वे जनता की बेहतरी के लिए भगीरथ प्रयास के नए मानक स्थापित कर रहे हैं।

अभी पिछले महीने ही उन्होंने मोबाइल टेलीमेडिसीन वाहन के ज़रिये उत्तर प्रदेश में अपने गृह जनपद ग़ाज़ीपुर के प्रत्येक कोरोना मरीज़ तक पहुँचने का प्रायस किया, जिससे कोई भी व्यक्ति कोविड टेस्ट, दवाइयों और इजाल से वंचित रह जाए। इतना ही नहीं, ग़ाज़ीपुर ज़िले में ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए उन्होंने ज़िला प्रशासन को 50 से अधिक ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर मुहैया करा कर कई ज़िंदगियों को नई साँसें देने में महती भूमिका निभाई।

22 हज़ार से अधिक फ़्रंटलाइन वर्कर्स की मदद

फ़्रंटलाइन वर्कर्स की बात करें, तो उनकी सुरक्षा और सुविधा के लिए भी तत्पर रहने में संजय राय का नाम अग्रणी रहा है। उन्होंने पुलिस, पत्रकारगण, रोडवेज़ बस कर्मचारियों समेत सभी कोरोना वॉरियर्स के लिए दवाई, मास्क, फ़ेस शील्ड समेत लभगभ सभी प्रकार की सुविधाएँ पहुँचाने का अथक प्रयास किया। उनके इन प्रयासों का ही नतीजा है कि लगभग 22,000 से भी अधिक लोगों तक ये स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाई जा चुकी हैं।

जनसरोकार के इन सब मुद्दों को आगे ले जाते हुए तथा अंत्योदय के विचारों को आत्मसात किए शेरपुरिया ने ग़ाज़ीपुर ज़िला अस्पताल के भीतर कोरोना के इलाज के लिए 50 बेड का आधुनिक ट्रॉमा सेंटर बनाने का संकल्प किया है। साथ ही ज़िला अस्पताल के सदर वोरा बाज़ार स्थित ट्रॉमा सेंटर, सदर वोरा बाज़ार में एक ऑक्सीजन प्लांट और 6 वेंटिलेटर भी 10 दिनों के भीतर कार्यरत हो जाएँगे।

चिता के सौदागरों के विरुद्ध बनाया लकड़ी बैंक

वर्तमान कठिन स्थितियों में जब केवल इलाज ही नहीं, अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी बुरी तरह से प्रभावित है, लकड़ी की कालाबाज़ारी और ऊँचे दामों की वजह से ग़रीब जनता को अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तब माँ गंगे की कृपा से संजय राय शेरपुरिया ने लकड़ी बैंक का गठन किया। लकड़ी बैंक न केवल निर्धन और आर्थिक दृष्टि से कमज़ोर लोगों के लिए अपनों को ससम्मान अंतिम विदाई देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, बल्कि वह माँ गंगा की अविरल, स्वच्छ और निर्मल धारा के सतत प्रवाह को बनाए रखने में भी प्रभावी सहयोग दे रहा है।

यूथ रूरल एंटरप्रेन्योर फ़ाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील सिंह के अनुसार फ़ाउंडेशन के संयोजक के तौर पर संजय राय फ़ाउंडेशन के प्रत्येक सदस्य के साथ निःस्वार्थ भाव से जनता की सेवा में लगे हुए हैं। विगत 20 दिनों से वे अलग-अलग क्षेत्रों, गाँवों का दौरा करते हुए हर ज़रूरतमंद की मदद का बीड़ा उठाए हुए हैं।

साथ मिल कर ही निपटा जा सकेगा संकट से : संजय

संजय राय का मानना है कि आज जब देश एक ऐसी महामारी की चपेट में है, जिसका न किसी को आभास था और न ही जिससे लड़ने की तैयारी थी, तब एक-दूसरे का साथ देकर, कंधे से कंधा मिला कर ही इस विकट परिस्थिति से पार पाया जा सकता है। मुश्किल वक़्त में लोगों के साथ खड़े रहना, उनकी ज़रूरतों, मुसीबतों का निवारण करना और जनता को साथ लेकर ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक मदद पहुँचाना आदि इस बात का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है कि जनसेवा और समर्पण के मानक पर संजय राय शेरपुरिया ने नए मानक स्थापित किए हैं।

Forbes ने भी की संजय की प्रशंसा

कोरोना काल में संजय राय शेरपुरिया की सेवाएँ इतनी प्रभावशाली रहीं कि वैश्विक मैगज़ीन ‘फ़ोर्ब्स’ ने भी संजय राय शेरपुरिया पर एक विशेष आलेख प्रकाशित किया है और शेरपुरिया के सेवा कार्यों की भरपूर प्रशंसा की है।