VIDEO : बूढ़ी माँ की पीएम मोदी से गुहार, ‘पॉलैण्ड में जीते-जी मर रहे मेरे लाल को भारत लौटा लाए सरकार’

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कैंसर पीड़ित ईश को उपचार-पीड़ा रहित मृत्यु के लिए ‘HOSPICE’ में भेजा

पत्नी की अनुमति के बिना ईश को नहीं मिल सकती ‘बलात् मृत्यु’ से मुक्ति

बूढ़ी माँ ने प्रधानमंत्री तथा विदेश मंत्री से बेटे को बचाने की लगाई गुहार

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 15 अप्रैल, 2021 (बीबीएन)। सम्पूर्ण सृष्टि में माँ को साक्षात् ईश्वर का रूप माना गया है। माँ वह होती है, जो अपनी संतान के सुख-शांति के लिए किसी भी सीमा तक जाकर कोई भी दु:ख-कष्ट सहने को सदैव तैयार रहती है। माँ अपनी संतान को कष्ट में देख ही नहीं सकती।

ऐसी ही एक माँ हैं अनूप विनोद महाजन, जिनका बेटा इस समय पॉलैण्ड (POLAND) में जीते-जी तिल-तिल कर मर रहा है। देश की राजधानी दिल्ली में रहने वाली 71 वर्प्रीय अनूप महाजन का 47 वर्षीय बेटा बीमार है, परंतु उसे वहाँ बलात् मृत्यु (जबरन मौत) के मुख में डाल दिया गया है। वृद्ध माँ बिलखते हुए कहती हैं कि उसके बेटे को भारत लाया जाए, तो उसे मौत से बचाया जा सकता है। अनूप महाजन ने अपने बेटे ईश महाजन को भारत लौटा लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा विदेश मंत्री एस. जयशंकर से गुहार लगाई है।

अनूप महाजन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस संबंध में एक पत्र लिखा और कहा है कि उनका बेटा ईश महाजन कैंसर से पीड़ित है। 47 वर्षीय ईश पॉलैण्ड में रहता है। ईश का परिवार चाहता है कि जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे ईश को भारत लाया जाए और सरकार इसमें सहयोग करे।

अनूप महाजन पत्र में लिखती हैं, ‘मेरे पुत्र ईश महाजन ने पॉलैण्ड के क्रकाउ (Kraków) में ब्रेन सर्जरी कराई थी। उसके उपचार में सहायता के लिए हम संघर्ष कर रहे हैं। हमने ईश को मेडिकल रिबेलिलिटेशन फैसिलिटी (Medical rehabilitation facility) में भेजने का आग्रह किया है। वहाँ का सारा ख़र्च उठाने का दायित्व भी लिया है। इसके बावजूद उसे हॉस्पाइस (Hospice) में भेज दिया गया है।’

हॉस्पाइस वह स्थान है, जहाँ मरीज़ को किसी भी प्रकार का उपचार दिए बिना पीड़ा रहित मृत्यु के लिए भेजा जाता है।  

अनूप महाजन ने पत्र में लिखा है कि ईश महाजन (ISH MAHAJAN) में हॉस्पाइस में भी उपचार के बिना ठीक होने के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। वह दोनों आँखें खोल सकता है। हाथ-पैर भी थोड़े हिला सकता है। वह स्वयं श्वासोच्छवास कर करने में सक्षम है। ईश के पुन: स्वस्थ होने की पूरी संभावना है, जिसे देखते हुए हम उसे भारत में गुरुग्राम (गुड़गाँव)-हरियाणा स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराना चाहते हैं। हमने मेदांता अस्पताल से सम्पर्क किया है। वहाँ के न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. वी. पी. सिंह को ईश की MRI सहित सभी मेडिकल रिपोर्ट्स भेजी हैं। डॉ. सिंह ने इन रिपोर्ट्स को देखने के बाद हमें एक पत्र लिखा है। यह पत्र हमने पॉलैण्ड स्थित भारतीय उच्चायोग तथा वहाँ की अदालत को पत्र भेज कर ईश महाजन को तत्काल भारत भेजने का आग्रह किया है।

अनूप महाजन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर तथा विदेश मंत्रालय से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर ईश महाजन को भारत लाने की गुहार लगाई है।

अनूप महाजन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कहा, ‘मेरा पुत्र चिकित्सकीय सहायता तथा उपचार के बिना मृत्यु के मुख में जा रहा है। आप मेरे पुत्र को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाएँ। मैं अपने युवा तथा इकलौते पुत्र को मानवता एवं करुणता के नाते तत्काल भारत लाने की बिनती करती हूँ।’

क्या है ईश महाजन की पूरी कहानी ?

ईश महाजन ने पॉलैण्ड की युवती के साथ प्रेम विवाह किया है, परंतु हाल में दोनों अलग-अलग रहते हैं। ईश के माता-पिता का आरोप है कि ईश की पत्नी ने ही पति को मरने के लिए छोड़ दिया है। उसी ने ईश को हॉस्पाइस भेजा है। ईश के माता-पिता अनूप महाजन तथा विनोद महाजन का कहना है कि ईश को हॉस्पाइस से निकालने तथा अच्छे अस्पताल में भर्ती कराने के लिए उसकी पत्नी की अनुमित आवश्यक है, क्योंकि पॉलैण्ड के क़ानून के अनुसार पति पर पहला अधिकार पत्नी का है, परंतु ईश की पत्नी ईश को हॉस्पाइस से निकाल कर अच्छे अस्पताल में भर्ती करवाने को तैयार नहीं है।

अनूप ने बहू के विरुद्ध कोर्ट केस किया

पॉलैण्ड के क़ानून के शिकंजे में फँसे पुत्र ईश को बचाने के लिए माता अनूप ने पॉलैण्ड की कोर्ट में बहू के विरुद्ध केस दाख़िल किया है। साथ ही उन्होंने पॉलैण्ड के विदेश मंत्रालय का दरवाज़ा भी खटखटाया है। अनूप महाजन का कहना है कि भारतीय विदेश मंत्रालय भी विशेष रुचि ले, तो उनके युवा पुत्र को बचा कर नया जीवन दिया जा सकता है।

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