बंगाल : कभी झूठ नहीं बोला एग्ज़िट पोल, तो 29 को किसका बजेगा ‘ढोल’ ?

0
168

परिवर्तन से पुनरावर्तन तक सटीक सिद्ध हुए एग्ज़िट पोल के निष्कर्ष

पुनरावर्तन से परिवर्तन तक भी परिणाम में बदलेंगे एग्ज़िट पोल ?

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 25 अप्रैल, 2021 (बीबीएन)। पश्चिम बंगाल के पिछले 10 वर्षों के इतिहास में मतदान पश्चात् होने वाले सर्वेक्षण अर्थात् EXIT POLL के निष्कर्ष हमेशा परिणाम के निकट ही पाए गए हैं। ऐसे में इस बार के विधानसभा चुनाव 2021 में भी यह अनुमान लगाया जा सकता है कि एग्ज़िट पोल में जिसका पलड़ा भारी होगा, वही कोलकाता पर राज करेगा। वैसे पश्चिम बंगाल सहित पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम 2 मई को आने वाले हैं, परंतु पश्चिम बंगाल में 8वें और अंतिम चरण के मतदान के बाद यानि 29 अप्रैल देर शाम को ही पाँचों राज्यों के एग्ज़िट पोल सामने आ जाएँगा।

पश्चिम बंगाल में वर्ष 2011 से पूर्व तीन दशकों से अधिक तक वामपंथी दलों का एक छत्र शासन रहा। इसी कारण स्वतंत्रता के बाद पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2006 तथा लोकसभा चुनाव 2009 तक वामपंथी दलों का दबदबा रहा। तब तक राज्य में वामपंथी दलों को टक्कर देने वाली एकमात्र पार्टी कांग्रेस थी, जो लगातार वामपंथी दलों से परास्त होती रही। ऐसे में वामपंथी दबदबे के दौरान यानि 2009 तक हुए सभी चुनावों के एग्ज़िट पोल तथा परिणामों की तुलनात्मक अध्ययन करने का कोई अर्थ नहीं है।

इसीलिए आज हम पश्चिम बंगाल में पिछले 10 वर्षों में हुए तीन चुनावों के एग्ज़िट पोल एवं परिणामों का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए 2 मई को आने वाले चुनाव परिणामों का अनुमान लगाने जा रहे हैं।

दस वर्षों में 4 चुनाव, परिवर्तन से पुनरावर्तन

पश्चिम बंगाल में पिछले 10 वर्षों में 4 चुनाव हुए हैं। इनमें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2011, लोकसभा चुनाव 2014, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2016 और लोकसभा चुनाव 2019 शामिल हैं। इन चार चुनावों में पश्चिम बंगाल की जनता ने परिवर्तन भी किया और पुनरावर्तन भी। जनता ने वर्ष विधानसभा चुनाव 2011 में जहाँ तीन दशक से अधिक समय से चले आ रहे वामपंथी दलों के शासन को उखाड़ फेंका। परिवर्तन की इस लहर में निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तथा उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) पहली बार सत्ता में आई। 2011 का वोट परिवर्तन के लिए पड़ा था, तो लोकसभा चुनाव 2014 और विधानसभा चुनाव 2016 में लोगों ने ममता और टीएमसी पर भरोसा जताते हुए पुनरावर्तन के लिए वोट डाला। इसी दौरान राज्य में अचानक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा-BJP) का उभार आया और टीएमसी के लिए लेफ्ट तथा कांग्रेस के स्थान पर भाजपा सबसे बड़ी चुनौती बन गई। बंगाल की जनता ने ममता को लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा को 42 में से 18 सीटों पर विजय दिला कर इस चुनौती का अहसास भी करा दिया था। ऐसे में भाजपा जहाँ लोकसभा चुनाव 2019 का, वहीं टीएमसी विधानसभा चुनाव 2016 का प्रदर्शन दोहराना चाहती है।

29 अप्रैल को तय हो जाएगा : ममता या मोदी ?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2011 में परिवर्तन की लहर, लोकसभा चुनाव 2014 तथा विधानसभा चुनाव 2016 में पुनरावर्तन की लहर और लोकसभा चुनाव 2019 में दोनों लहरों के बीच हुए मतदान के पश्चात् आए एग्ज़िट पोल चुनाव परिणाम से लगभग मेल खा रहे थे। इसका अर्थ यह हुआ कि 29 अप्रैल को आने वाला एग्ज़िट पोल यह तय कर देगा कि 2 मई को किसका ढोल बजेगा ? जनता ममता को ‘राम-राम’ कहेगी या मोदी का ‘जय श्री राम’ चलेगा ? हालाँकि भाजपा ने इस बार 2019 की अर्ध परिवर्तन लहर को पूर्ण परिवर्तन लहर बनाने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा दिया। ऐसे में पिछले 4 एग्ज़िट पोल के निष्कर्षों को देखते हे 29 अप्रैल को आने वाला एग्ज़िट पोल काफ़ी रोमांचक होगा और लगभग 2 मई से पहले ही तय कर देगा कि कोलकाता में मुख्यमंत्री के रूप में ममता बैठेंगी या फिर भाजपा का नवनियुक्त चेहरा ?

29 अप्रैल का एग्ज़िट पोल क्यों महत्वपूर्ण ?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2011, लोकसभा चुनाव 2014, विधानसभा चुनाव 2016 और लोकसभा चुनाव 2019 के परिणामों से पूर्व आए एग्ज़िट पोल के आँकड़ों से आप स्वयं ही अनुमान लगा सकते हैं कि चारों चुनाव परिणाम एग्ज़िट पोल के निष्कर्षों के अत्यंत निकट थे।

उपरोक्त चारों एग्ज़िट पोल से स्पष्ट है कि हर बार एग्ज़िट पोल के निष्कर्ष ही नतीजों में बदले हैं। इसीलिए 29 अप्रैल को एग्ज़िट के जो निष्कर्ष आएँगे, वे काफ़ी हद तक 2 मई को आने वाले परिणामों का संकेत करेंगे।

READ IN GUJARATI : બંગાળ : ખોટા નથી પડતાં એક્ઝિટ પોલ, તો 29મીએ કોનો વાગશે ‘ઢોલ’ ?