V अगर B बन जाए : एक ‘अक्षर’ बदलते ही ‘क्षर’ होने लगता है इंसान !

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विश्व क्षय दिवस पर विशेष

129 साल लगे थे टीका खोजने में

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद। आज हर घर में बीवी हो या न हो, लेकिन TV यानि TELEVISION ज़रूर होता है। अपने आगमन के साथ ही इडियट बॉक्स की उपाधि धारण करने वाले टेलीविज़न ने शुरुआत में अपने संक्षिप्त नाम यानि टीवी से कई लोगों को डराया था, क्योंकि टीवी नाम टीबी से मिलता-जुलता है। जब TV का आगमन हुआ, उस समय TB एक असाध्य रोग था।

अब आते हैं हैडिंग पर। आज TV हर घर में मनोरंजन का प्रमुख साधन है। लोग फुरसत के समय में TV देख कर मनोरंजन करते हैं। बदलते डिजिटल युग में TV पर हज़ारों प्रकार के चैनल्स आ चुके हैं।

आज जब विश्व क्षय दिवस मनाया जा रहा है, तब कल्पना कीजिए कि मनोरंजन देने वाले टेलीविज़न शब्द के संक्षिप्त रूप TV में केवल एक अक्षर V के स्थान पर B आ जाए, तो ? T के साथ अगर V के स्थान B लग जाए, तो ? केवल एक अक्षर के फेरबदल से मनोरंजन की दुनिया में खोया इंसान मेडिसीन की दुनिया में घुस जाएगा। एक अक्षर का फेर इंसान की देह को क्षर करने लग जाएगा।

139 साल पहले बुख़ार-खाँसी से मर जाते थे लोग

139 वर्ष से पहले की पूरी दुनिया टीबी नामक घातक बीमारी से अंजान थी। यक्ष्मा, तपेदिक, क्षय, एमटीबी या टीबी (Tubercle Bacillus) नामक इस बीमारी में बुख़ार, खाँसी एवं वज़न घटने जैसे लक्षण होते हैं। 139 वर्ष पहले की दुनिया में लोग जब इस माइक्रोबैक्टेरियल बीमारी का शिकार होते थे, तो डॉक्टरों के इलाज के बावजूद मरीज़ की मौत हो जाती थी, क्योंकि डॉक्टर तो बुख़ार एवं खाँसी का ही इलाज करते थे।

इस महात्मा ने पहचाना टीबी को

जब दुनिया में बुख़ार-खाँसी के सामान्य लक्षणों वाले अनजान रोग से लोग मर रहे थे, तब जर्मनी के फिज़िशियन तथा माइक्रोबायोलॉजिस्ट हेनरिच हरमैन रॉबर्ट कोच (Heinrich Hermann Robert Koch ) ने 24 मार्च, 1882 को गूढ़ अध्ययन के बाद टीबी की पहचान की। इसके बाद इसके इलाज पर काम शुरू हुआ।

जब घातक हो गया टीबी

टीबी एक संक्रामक रोग है। इलाज के अभाव में एक समय यह रोग इतना घातक हो गया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को 1993 में टीबी को वैश्विक स्वास्थ्य आपदा घोषित करना पड़ा।

129 साल बाद मिला टीका

आज पूरी दुनिया कोरोना वायरस (CORONA VIRUS) संक्रमण से फैली कोविड 19 (COVID 19) महामारी से परेशान है और इस महामारी का टीका खोजने में दुनिया को लगभग 1 साल ही लगा, परंतु आपको जान कर आश्चर्य होगा कि टीबी का टीका खोजने में दुनिया को 129 साल लग गए थे। 2011 में bacille Calmette-Guerin (BCG) टीका खोजा गया, जो प्रभावशाली सिद्ध हुआ। 2011 के बाद जन्मे बच्चों को बीसीजी का टीका लगा कर टीबी से सुरक्षित करने में सफलता मिली है, परंतु 2011 से पूर्व जन्मे लोगों पर टीबी का ख़तरा है। यद्यपि अब टीबी असाध्य रोग नहीं रह गया है और इसका उपचार संभव हो चुका है।