हे भगवान ! गुजरात में एक साथ ‘लापता’ हुए 62.33 लाख लोग !

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विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 22 फरवरी, 2021 (बीबीएन नेटवर्क)। क्या किसी राज्य या शहर में एक ही दिन में एक साथ 62 लाख 33 हज़ार 485 लोग लापता हो सकते हैं ?

आपका उत्तर होगा, ‘नहीं, ये कैसे हो सकता है ?’ लेकिन यह सही है। गुजरात में 21 फरवरी, 2021 को ऐसा ही हुआ, जब छह महानगर पालिकाओं के चुनाव के लिए मतदान चल रहा था। हम उन 62 लाख 33 हज़ार 485 लोगों की बात कर रहे हैं, जो रविवार को ‘लापता’ थे। लापता इसलिए, क्योंकि ये लोग मतदान करने नहीं आए। संभव है कि चंद लोग किन्हीं कारणों से मजबूर होंगे और मतदान नहीं कर पाए होंगे, लेकिन इन चंद लोगों को निकाल भी दें, तो भी मतदान न करने वालों का आँकड़ा इतना भारी है कि हमें विश्वास ही नहीं होता कि महानगरों की तथाकथित जागरूक, डिजिटल युग में जीने और सोशल मीडिया पर टिप्पणियाँ करने वाली जनता इतनी लापरवाह भी हो सकती है।

गुजरात में छह महानगर पालिकाओं के 144 वॉर्डों की 576 सीटों के लिए रविवार को मतदान निर्धारित था। गुजरात के राज्य चुनाव आयोग (SEC GUJARAT) के अनुसार इन 6 महानगर पालिकाओं में कुल 1 करोड़ 14 लाख 66 हज़ार 864 लोगों को मतदान करना था, लेकिन मतदान की 10 घण्टों की अवधि में केवल 52 लाख 33 हज़ार 382 यानी 45.64 प्रतिशत लोग ही मतदान करने पहुँचे, जबकि 62 लाख 33 हज़ार 482 यानी 54.36 प्रतिशत लोगों को मतदान केन्द्र जाकर मतदान करने की फुरसत ही नहीं मिली !

रविवार की छुट्टी होने के बावजूद यदि इतनी बड़ी संख्या में लोग मतदान न करें, तो हमें उन ‘अ’मतदाताओं को लापता, ग़ायब या लुप्त ही तो कहना होगा न ! और क्या कहा जा सकता है इनके बारे में !

‘लापता’ में सबसे आगे अहमदाबाद

अहमदाबाद अर्थात् गुजरात की आर्थिक एवं राजनीतिक राजधानी। उत्तर गुजरात में पड़ने वाले अहमदाबाद में महानगर पालिका के 48 वॉर्डों की 192 सीटों के लिए 46 लाख 24 हज़ार 592 लोगों को मतदान करना था, लेकिन मतदान केन्द्र पर पहुँचे केवल 19 लाख 65 हज़ार 895 यानी 42.51 प्रतिशत लोग, तो इसका मतलब यही हुआ न कि 26 लाख 58 हज़ार 697 लोग रविवार की छुट्टी वाले दिन सुबह देर से उठे, दोपहर को खाना खाकर सो गए और शाम को चाय पीकर ही घर से बाहर निकले, जब मतदान का समय पूरा हो चुका था। 26 लाख 58 हज़ार 697 लापता लोगों के साथ अहमदाबाद इस मामले में शीर्ष पर रहा, जो लोकतंत्र तथा पूरे अहमदाबाद के लिए लज्जाजनक बात ही कहलाएगी। इसी प्रकार दक्षिण गुजरात में पड़ने वाले सूरत में 30 वॉर्डों की 120 सीटों के लिए 32 लाख 88 हज़ार 159 में से केवल 14 लाख 96 हज़ार 301 यानी 45.51 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया। सूरत में 17 लाख 91 हज़ार 858 लोग लापताओं की सूची में शामिल हैं, तो मध्य गुजरात में पड़ने वाले वडोदरा में 19 वॉर्डों की 76 सीटों के लिए 14 लाख 46 हज़ार 212 लोगों को मतदान करना था, लेकिन केवल 6 लाख 94 हज़ार 68 यानी 47.99 प्रतिशत मतदाता ही मतदान पहुँचे। 7 लाख 52 हज़ार 144 मतदाता लापता रहे।

सौराष्ट्र ने बचाई साख

यद्यपि सौराष्ट्र में पड़ने वाली 3 महानगर पालिकाओं में लोकतंत्र की साख बचती हुई दिखाई दी, जहाँ लगभग 50-51 प्रतिशत मतदान हुआ। इनमें राजकोट में 18 वॉर्डों की 72 सीटों के लिए 10 लाख 93 हड़ार 991 मतदाताओं में से 5 लाख 55 हज़ार 159 यानी 50.75 लोगों ने मतदान किया, लेकिन 5 लाख 38 हज़ार 832 मतदाता ग़ायब पाए गए। जामनगर में 16 वॉर्डों की 64 सीटों के लिए 4 लाख 88 हज़ार 996 लोगों को मतदान करना था, लेकिन 2 लाख 62 हज़ार 300 यानी 53.64 लोग मतदान करने पहुँचे, जबकि 2 लाख 26 हज़ार 696 ने आराम फ़रामाया। भावनगर में 13 वॉर्डों की 52 सीटों के लिए 5 लाख 24 हज़ार 914 में से केवल 2 लाख 59 हज़ार 659 यानी 49.47 लोगों ने ही मतदान किया। शेष 2 लाख 65 हज़ार 255 लोग लापता रहे।