फिर जलाओ ‘गांधी वाली होली’ : नस-नस में घुस चुके चीनी नासूर को निकाल फेंकने का यही सही समय है…

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जीवन-व्यवहार को ‘चीन मुक्त’ बनाना ही शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि

मोदी सरकार ने BSNL के ज़रिए छेड़ दिया #BoycottChina आंदोलन

हम ठान लें, तो ‘नीच’ चीन और बूचे चीनियों की कमर तोड़ सकते हैं

MADE IN CHINA का बहिष्कार ही बना देगा CHINA को MAD

विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद (18 जून, 2020)। आज से ठीक 65 दिन बाद यानी 22 अगस्त, 2020 को भारत के लिए एक ऐतिहासिक दिन आने वाला है। यही वह दिन था, जब 99 वर्ष पहले यानी 22 अगस्त, 1921 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अंग्रेज़ी साम्राज्य के विरुद्ध छेड़े गए असहयोग आंदोलन के बीच स्वदेशी का नारा दिया था और विदेशी वस्त्रों तथा सामानों की होली जलाई थी।

99 वर्ष पहले ब्रिटिश साम्राज्य की आधीनता वाले भारत पर जब विदेशी सामानों की निर्भरता इस हद तक बढ़ गई कि भारतीय उत्पादों, घरेलू उद्योगों, कुटीर उद्योगों को बड़े पैमाने पर हानि का सामना करना पड़ रहा था, तब महात्मा गांधी ने स्वदेशी आंदोलन छेड़ा और लोगों से विदेशी वस्त्रों तथा सामानों का त्याग कर उनकी होली जलाने का आह्वान किया। गांधीजी की एक अपील पर देशवासियों ने विदेशी वस्त्रों सहित सामानों का सड़कों पर ढेर लगा दिया और जगह-जगह उनकी होली जलाई।

आज 99 वर्ष बाद भारत भले ही एक स्वतंत्र देश हो, परंतु स्वतंत्रता के बाद और महात्मा गांधी के निधन के बाद स्वदेशी आंदोलन लगातार कमज़ोर पड़ता गया और इस हद तक कमज़ोर पड़ गया कि आज भारत तथा भारतीयों की नस-नस में विदेशी उत्पाद घर कर चुके हैं, जिनमें 60 से 75 प्रतिशत तक चीनी उत्पाद हैं।

सहिष्णुता में सहन करते रहे चीन की चालबाज़ियाँ

एक सहिष्णु राष्ट्र के रूप में भारत ने कभी भी किसी राष्ट्र विशेष के विरुद्ध कोई द्वेष भाव नहीं रखा। यहाँ तक कि 1965 में पीठ में छुरा घोंपने वाले चीन को भी भारत ने उदारता से स्वीकार किया। भारत-चीन युद्ध 1965 से लेकर अप्रैल-2020 तक यानी 55 वर्षों में चीन ने भारत से जुड़ी सीमाओं को लेकर कई बार डोकलाम सहित अनेक प्रकार के विवाद खड़े किए, घुसपैठ की तथा भारतीय नेताओं के सिक्किम एवं अरुणाचल प्रदेश के दौरों पर आपत्तियाँ भी जताईं।

चीन की एक-एक गंभीर भूल को भारत, भारत की सरकार इसी आशा के साथ बर्दाश्त करते रहे कि आज नहीं तो कल, चीन अपनी फितरत में सुधार लाएगा। हालाँकि भारतीय नागरिक समय-समय पर चीन के विरुद्ध आक्रोश व्यक्त करते रहे तथा चीन व चीनी सामानों का बहिष्कार करने का आह्वान करते रहे, परंतु एक उत्तरदायी राष्ट्र एवं एक सरकार के रूप में भारत ने चीन के साथ संबंधों को शांतिपूर्ण बनाए रखने के प्रयास जारी रखे। दूसरी ओर चीन ने कुटिल विस्तारवादी नीति पर क़ायम रहते हुए भारत में कारोबार को दिन दूनी-रात चौगुनी गति से बढ़ाया।

‘गलवान’ ने भड़का दी चीन विरोधी ज्वाला

अप्रैल-2020 तक भारत ने सब कुछ बर्दाश्त किया, परंतु 14/15 जून, 2020 की रात गलवान घाटी में चीनी सेना ने जो ग़लती की, उसने भारत के धैर्य का बांध तोड़ दिया। लद्दाख स्थित वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी सैनिकों ने घात लगा कर भारतीय सैनिकों पर आक्रमण किया। भारत को एक सैन्य अधिकारी सहित 20 जवान बलिदान करने पड़े, तो भारत, भारत की सरकार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर एक साधारण भारतीय का आक्रोश चरम पर पहुँच गया और यही कारण है कि 55 वर्षों से जिस चीन के बहिष्कार की ज्वाला मद्धिम थी, वह अब भड़क उठी है।

जवानों के बलिदान को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जहाँ चीन को सैन्य, सीमा, अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक सहित सभी स्तरों पर घेराबंदी शुरू कर दी है, वहीं लोगों ने भी चीनी सामानों के बहिष्कार की शुरुआत कर दी है और यही सही समय भी है कि भारत और भारतीय चीनी सामानों पर निर्भरता के ताबूत में आख़िरी क़ील लगा ही दें। फिर एक बार 1921 में जली गांधी वाली होली जलाई जाए, जिसमें केवल और केवल चीनी सामान हो।

मोदी का जिनपिंग पर पहला प्रहार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तो भारत में चीनी कंपनियों के विरुद्ध अभियान का सूत्रपात कर दिया है। वैसे मोदी सरकार ने चीन के साथ सीमा विवाद शुरू होने तथा कोरोना संकट काल में ही यह समझ लिया था कि भारत को आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है। मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान छेड़ दिया था, जिसका सीधा लक्ष्य चीन ही था। अब जबकि चीन ने गलवान घाटी में भारत के साथ युद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए, तब मोदी सरकार ने भारत से चीनियों की घर वापसी के अभियान पर काम शुरू कर दिया है। निश्चित रूप से चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर मोदी का यह पहला बड़ा और घातक प्रहार सिद्ध होने वाला है।

मोदी सरकार ने बुधवार को ही निर्णय कर लिया कि संचार मंत्रालय के अधीन कार्यरत् भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) की 4जी टेक्नोलॉजी की स्थापना में चीनी उपकरणों का उपयोग नहीं किया जाएगा। संचार मंत्रालय ने बीएसएनएल को 4जी टेक्नोलॉजी की स्थापना के लिए पूर्व में जारी टेंडर रद्द करने तथा नए सिरे से टेंडर जारी करने को कहा है, जिसमें किसी भी चीनी कंपनी को टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार नहीं होगा। गलवान में रक्तरंजित संघर्ष करने वाले चीन के लिए मोदी सरकार का यह निर्णय बड़ा आर्थिक झटका होगा। इतना ही नहीं, चीनी कंपनियों को अब भारत में 5जी टेक्नोलॉजी के टेंडर से भी हाथ धोना पड़ेगा।

सामानों की नहीं, शहादतों की कीमत !

मोदी सरकार ने बीएसएनएल के माध्यम से चीन के बहिष्कार अभियान का सूत्रपात कर दिया है। ट्विटर पर भी #BoycottChina ट्रेंड कर रहा है। देश के कई हिस्सों में लोग अपने घरों में मौज़ूद मोबाइल फोन-टेलीविज़न आदि चीनी उपकरणों को सड़कों पर लाकर फेंक रहे हैं, तोड़ रहे हैं। गुजरात में भी लोगों ने अपने चीनी टीवी को पैरों तले रौंद डाला। इन जनभावनाओं में भारतीय जवानों की शहादत को लेकर न केवल रोष है, बल्कि उनके मन में अपने पसीने की कमाई से ख़रीदे गए चीनी सामानों की कीमत से कहीं ऊँची कीमत शहादतों की है।

जानकारों को झुठलाने की चुनौती

सामान्य रूप से चीन के बहिष्कार की बात आती है, तो हमारे देश के आर्थिक एवं व्यावसायिक जगत के कई जानकार मैदान में आ जाते हैं। ये लोग अपनी विशेषज्ञता का प्रदर्शन करते हुए कहते हैं कि चीनी सामानों से छुटकारा पाना इतना आसान नहीं है। कोई बड़े-बड़े आँकड़े देता है, तो कोई बड़ी-बड़ी आर्थिक हानि से डराता है। नि:संदेह इन जानकारों के मन में भी चीन के विरुद्ध रोष है, परंतु वे देश की अर्थ व्यवस्था की भी चिंता करते हैं, लेकिन यही सही समय है कि एक-एक भारतीय चीनी उत्पादों का बहिष्कार करके जानकारों को झूठा सिद्ध कर दे।

सस्ते के लोभ पर भारी हो चीन विरोधी क्रोध

जानकारों को झुठलाने की इस चुनौती को स्वीकार करते हुए हर भारतीय अपने जीवन-आचरण को नीच चीन के सामानों से मुक्त बनाने का संकल्प कर ले, तो गांधी वाली 1921 की होली 99 साल बाद फिर एक बार जलाना बहुत कठिन काम नहीं है। हालाँकि गांधीजी ने जब विदेशी सामानों की होली जलाई थी, तब देश स्वदेशी उत्पाद को लेकर इतना सक्षम नहीं था। ऐसे में आज जब देश स्वदेशी उत्पाद में सक्षम है, सरकार का भी समर्थन है, तो लोगों के लिए चीन को घातक आर्थिक चोट पहुँचाने का सबसे उचित समय यही है। MADE IN CHINA का बहिष्कार करने मात्र से ही CHINA को MAD बनाया जा सकता है।

चीन की ताक़त उसकी मज़बूत अर्थ व्यवस्था है और हमारी ताक़त है कि हम सबसे बड़ा बाज़ार हैं। भारतीय चीनी सामान इसलिए ख़रीदते हैं, क्योंकि चीन का सामान भारत में उत्पादित सामानों से सस्ता होता है, परंतु सस्ते के लोभ पर भारी होना चाहिए हमारे जवानों की हत्या करने वाले चीन के विरुद्ध क्रोध। चीन के लिए हम अपना बाज़ार बंद कर दें। यही आज के समय में गलवान घाटी में शहीद हुए 20 जवानों के प्रति एक सच्चे भारतीय की सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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