सुनिए-पढ़िए PM मोदी का पूरा संदेश : 34 मिनट और 2200 शब्दों में 15 बार ‘आत्मनिर्भर भारत’ का उद्घोष

0
626

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

सभी देशवासियों को नमस्कार। कोरोना संक्रमण से मुक़ाबला करते हुए दुनिया को अब चार महीने से ज़्यादा हो गया है। इस दौरान तमाम देशों के 42 लाख से ज़्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं। पौने तीन लाख से ज़्यादा लोगों की दु:खद मृत्यु हुई है। भारत में भी अनेक परिवारों ने स्वजन खोए हैं। मैं सभी के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूँ।

साथियों, एक वायरस ने दुनिया को तहस-नहस कर दिया है। विश्व भर में करोड़ों ज़िंदगियाँ संकट का सामना कर रही हैं। सारी दुनिया ज़िंदगी बचाने में एक प्रकार से जंग में जुटी है। हमने ऐसा संकट न देखा है, न ही सुना है। निश्चित तौर पर मानव जाति के लिए यह सब कुछ अकल्पनीय है। यह क्राइसिस अभूतपूर्व है, लेकिन थकना,  हारना, टूटना, बिखरना, मानव को मंज़ूर नहीं है। सतर्क रहते हुए… ऐसी जंग के सभी नियमों का पालन करते हुए… अब हमें बचना भी है और आगे बढ़ना भी है।

आज जब दुनिया संकट में है, तब हमें अपना संकल्प और मज़बूत करना होगा। हमारा संकल्प इस संकट से भी विराट होगा। हम पिछली शताब्दी से ही लगातार सुनते आए हैं कि 21वीं सदी हिन्दुस्तान की है। हमें कोरोना से पहले की दुनिया को वैश्विक व्यवस्थाओं को विस्तार से देखने समझने का मौका मिला है। कोरोना संकट के बाद भी दुनिया में जो स्थिति बन रही है, उसे भी हम देख रहे हैं। जब इन दोनों कालखंडों को भारत के नज़रिये से देखते हैं, तो लगता है 21वीं सदी भारत की हो… यह हमारा सपना ही नहीं, हम सबक की ज़िम्मेदारी है, लेकिन इसका मार्ग क्या होगा ? विश्व की आज की स्थिति हमें सिखाती है कि इसका मार्ग एक ही है, ‘आत्मनिर्भर भारत’। हमारे यहाँ शास्त्रों में कहा गया है ‘एश: पंथ:’ यानी यही रास्ता है, ‘आत्म निर्भर भारत’।

एक राष्ट्र के रूप में आज हम बहुत अहम मोड़ पर खड़े हैं। इतनी बड़ी आपदा भारत के लिए एक संकेत लेकर आई है, संदेश लेकर आई है, एक अवसर लेकर आई है। मैं एक उदाहरण के साथ अपनी बात बताने का प्रयास करता हूँ… देता हूँ, जब कोरोना संकट शुरू हुआ, तो भारत में एक भी पीपीई किट और एन 95 मास्क का नाममात्र उत्पादन होता था। आज भारत में 2 लाख पीपीई किट और 2 लाख एन 95 मास्क बनाए जा रहे हैं। यह हम इसलिए कर पाए, क्योंकि भारत ने आपदा को अवसर में बदल दिया।

भारत की यह दृष्टि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए उतनी ही प्रभावी सिद्ध होने वाली है। आज विश्व में ‘आत्मनिर्भर’ शब्द के मायने पूरी तरह बदल गए हैं। अर्थ-केंद्रित वैश्वीकरण बनाम मानव-केंद्रित वैश्वीकरण की चर्चा आज ज़ोंरो पर है। विश्व के सामने भारत का मूलभूत चिंतन आशा की किरण नज़र आता है। भारत की संस्कृति, भारत के संस्कार आत्मनिर्भरता की बात करते हैं, उस आत्म निर्भरता की बात करते हैं, जिसकी आत्मा ‘वसुधैव कुटुंम्बकम्’ है… विश्व एक परिवार। भारत जब आत्मनिर्भरता की बात करता है, तो आत्म-केंद्रित व्यवस्था की वक़ालत नहीं करता है। भारत की आत्मनिर्भरता में संसार के सुख, सहयोग और शांति की चिंता होती है। जो संस्कृति ‘जय जगत’ में विश्वास करती हो, जो ‘जीव मात्र का कल्याण’ चाहती हो, जो पूरे विश्व को परिवार मानती हो, जो अपनी आस्था में ‘माता भूमि: पुत्रो अहं पृथिव्या’ की सोच रखती हो, जो पृथ्वी को माँ मानती हो… वह संस्कृति, वह भारत भूमि जब आत्मनिर्भर बनती है, तो उससे सुखी विश्व की संभावना भी सुनिश्चित होती है।  

भारत की प्रगति में हमेशा विश्व की प्रगति समाहित रही है। भारत के लक्ष्यों का प्रभाव, भारत के कार्यों का प्रभाव विश्व कल्याण पर पड़ता ही है। जब भारत खुले में शौच से मुक्त होता है, तो दुनिया की भी तसवीर बदलती है। टीबी हो, कुपोषण हो, पोलिया हो… भारत के अभियानों का असर दुनिया पर पड़ता ही है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस… ग्लोबल वॉर्मिंग के ख़िलाफ भारत की दुनिया को सौगात है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पहल… मानव जीवन को तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए भारत का उपहार है।

ज़िंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रही दुनिया के लिए भारत की दवाइयाँ नई आशा लेकर पहुँचती है। इन कदमों से दुनिया भर में भारत की प्रशंसा होती है… तो स्वभाविक है कि हर भारतीय गर्व करता है। दुनिया को विश्वास होने लगा है कि भारत बहुत अच्छा कर सकता है… मानव जाति की कल्याण के लिए भारत बहुत कुछ अच्छा दे सकता है। सवाल यह है कि आखिर कैसे ? इस सवाल का भी उत्तर है 130 करोड़ देशवासियों का ‘आत्मनिर्भर भारत’ का संकल्प। हमारा सदियों का गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। भारत जब समृद्ध था… सोने की चिड़िया कहा जाता था… संपन्न था, तब सदा विश्व कल्याण की राह पर चला। वक़्त बदल गया… देश ग़ुलामी की जंज़ीरों में जकड़ गया। हम विकास के लिए तरसते रहे। आज फिर भारत विकास की तरफ सफलतापूर्वक कदम बढ़ा रहा है, तब भी विश्व कल्याण की राह पर अटल है। 

याद करिए इस शताब्दी की शुरुआत के समय Y2K संकट आया था… भारत के टेक्नॉलजी एक्सपर्ट्स ने दुनिया को उस संकट से निकाला था। आज हमारे पास साधन हैं, सामर्थ्य है, हमारे पास दुनिया की सबसे बेहतरीन टैलेंट है। हम बेस्ट प्रॉडक्ट्स बनाएँगे। अपनी क्वॉलिटी और बेहतर बनाएँगे। सप्लाई चेन को आधुनिक बनाएँगे। यह हम कर सकते हैं और हम ज़रूर करेंगे।

मैंने अपनी आँखों के सामने कच्छ भूकंप के वे दिन देखे हैं। हर तरफ सिर्फ़ मलबा ही मलबा था। सब कुछ ध्वस्त हो गया था। ऐसा लगता था कि मानों, कच्छ मौत की चादर ओढ़ कर सो गया। तब कोई सोच नहीं सकता था कि कभी हालात बदलेंगे, लेकिन देखते ही देखते कच्छ उठ खड़ा हुआ, कच्छ चल पड़ा, कच्छ बढ़ चला। यह हम भारतीयों की संकल्प शक्ति है। हम ठान लें, तो कोई लक्ष्य, कोई राह मुश्क़िल नहीं है। आज तो चाह भी है और राह भी है। यह है भारत को आत्मनिर्भर बनाना। भारत की संकल्प शक्ति ऐसी है कि भारत आत्मनिर्भर बन सकता है।

आत्मनिर्भर भारत की यह भव्य इमारत पाँच पिलर पर खड़ी होगी। पहला पिलर- इकोनॉमी.. एक ऐसी इकोनॉमी, जो इन्क्रीमेंटल चेंज नहीं, बल्कि क्वॉण्टम जम्प लाए। दूसरा पिलर है- इंफ्रास्ट्रक्चर… एक ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर, जो आधुनिक भारत की पहचान बने। तीसरा पिलर हमारा सिस्टम… एक ऐसा सिस्टम, जो बीती शताब्दी की रीति-नीति नहीं, बल्कि 21वीं सदी के सपनों को साकार करने वाली टेक्नोलॉजी-ड्रिवन व्यवस्था पर आधारित हो। चौथा पिलर हमारी डेमोग्राफी… दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रैसी में हमारी वाइब्रेंट डेमोग्राफी हमारी ताक़त है… आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी ऊर्जा का स्त्रोत है। पाँचवा पिलर है  डिमांड… हमारी अर्थव्यवस्था में डिमांड और सप्लाई का जो चक्र है, जो ताक़त है उसे पूरी क्षमता से इस्तेमाल किए जाने की ज़रूरत है। देश में डिमांड बढ़ाने के लिए, डिमांड को पूरा करने के लिए हमारी सप्लाई चेन के हर स्टेक होल्डर का सशक्त होना ज़रूरी है। हमारी सप्लाई चेन, हमारी आपूर्ति की उस व्यवस्था को हम मज़बूत करेंगे, जिसमें मेरे देश की मिट्टी की महक हो, हमारे मज़दूरों के पसीने की ख़ुशबू हो।

कोरोना संकट का सामना करते हुए मैं नए संकल्प के साथ विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा करता हूँ। यह आर्थिक पैकेज ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की अहम कड़ी के तौर पर काम करेगा। हाल में सरकार ने कोरोना संकट से जुड़ी जो आर्थिक घोषणाएँ की थीं, जो आरबीआई के फ़ैसले थे और जो आज जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान हो रहा है… तो यह क़रीब 20 लाख करोड़ रुपए का है। यह पैकेज भारत की जीडीपी का करीब 10 फ़ीसदी है। इसके ज़रिये विभिन्न वर्गों को, आर्थिक व्यवस्था की कड़ियों को 20 लाख करोड़ रुपए का संबल मिलेगा। 20 लाख करोड़ रुपए का यह पैकेज ट्वेंटी-ट्वेंटी में देश की विकास यात्रा को, ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को नई गति देगा। ‘आत्मनिर्भर भारत’ संकल्प को सिद्ध करने के लिए लैंड, लैबर, लिक्विडिटी और लॉस सभी पर बल दिया गया है।

यह आर्थिक पैकेज हमारे कुटीर उद्योग, गृह उद्योग, मंझौले उद्योग के लिए है, जो करोड़ों लोगों की आजीविका का साधन है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प का मजबूत आधार हैं। यह आर्थिक पैकेज देश के उन श्रमिकों के लिए है, उन किसानों के लिए है, जो हर स्थिति, हर मौसम में देशवासियों के लिए दिन-रात परिश्रम करते हैं। यह आर्थिक पैकेज हमारे देश के मध्यम वर्ग के लिए है, जो ईमानदारी से टैक्स देता है। देश के विकास में अपना योगदान देता है। यह आर्थिक पैकेज उद्योग जगत के लिए है, जो भारत के आर्थिक सामर्थ्य को बुलंदियों पर ले जाने के लिए संकल्पित है। कल (13 मईमईमई, 2020) से आने वाले कुछ दिनों तक वित्त मंत्री द्वारा आर्थिक पैकेज की विस्तार से जानकारी दी जाएगी। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए रिफॉर्म की प्रतिबद्धता के साथ भारत का आगे बढ़ना अनिवार्य है।

आपने भी अनुभव किया है कि बीते छह वर्षों में जो रिफॉर्म हुए हैं, उनके कारण आज इस संकट में भारत की व्यवस्था ज़्यादा सक्षम नज़र आई है। कौन सोच सकता था कि भारत सरकार जो पैसा भेजेगी, वह पूरा का पूरा ग़रीब और किसान की जेब में पहुँचेगा ? यह तब हुआ, जब सभी सरकारी दफ़्तर बंद थे, ट्रांसपोर्ट के साधन बंद थे। जनधन आधार, मोबाइल… JAM की त्रिशक्ति से जुड़ा एक रिफॉर्म था, जिसका असर हमने देखा। अब रिफॉर्म के… उसके दायरे को व्यापक करना है। यह रिफॉर्म खेती से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन में होंगे, ताकि किसान भी सशक्त हों और भविष्य में कोरोना जैसे किसी दूसरे संकट में कृषि पर कम से कम असर हो। ये रिफॉर्म टैक्स सिस्टम, उत्तम इन्फ्रास्ट्रक्चर, समर्थ ह्यूमन रिसोर्सेज़ और मज़बूत फाइनैंशियल सिस्टम के निर्माण के लिए होंगे। ये रिफॉर्म बिज़नेस को प्रोत्साहित करेंगे, निवेश को बढ़ाएँगे और मेक इन इंडिया के संकल्प को मज़बूत करेंगे।

आत्मनिर्भरता, आत्मबल और आत्मविश्वास से ही संभव है। आत्मनिर्भरता… ग्लोबल सप्लाई चेन में कड़ी प्रतिस्पर्धा के लिए भी देश को तैयार करती है। आज समय की मांग है कि भारत हर स्पर्धा में जीते, ग्लोबल सप्लाई चेन में बड़ी भूमिका निभाए। इसे समझते हुए आर्थिक पैकेज में अनेक प्रावधान किए गए हैं… आर्थिक पैकेज में अनेक प्रावधान किए गए हैं। इससे हमारे सभी सेक्टर की एफीशिएंसी बढ़ेगी और क्वॉलिटी सुनिश्चित होगी।

यह संकट इतना बड़ा है कि बड़ी से बड़ी व्यवस्थाएँ हिल गईं, लेकिन इन्हीं परिस्थितियों में हमने… देश ने हमारे ग़रीब भाई बहनों की संघर्ष शक्ति, उनकी संयम शक्ति का दर्शन किया है। ख़ासकर हमारे रेहड़ी, ठेला लगाने वाले, पटरी पर सामान बेचने वाले हैं, श्रमिक साथी हैं, घरों में काम करने वाले भाई-बहन हैं… उन्होंने इस दौरान बहुत कष्ट झेले हैं, तपस्या की है, त्याग किया है। ऐसा कौन है, जिसने उनकी अनुपस्थिति को महसूस नहीं किया ? अब हमारा कर्त्व्य है उन्हें ताक़तवर बनाने का, उनके आर्थिक हितों के लिए कुछ बड़े कदम उठाने का। इसे ध्यान में रखते हुए ग़रीब हों, श्रमिक हों, प्रवासी मज़दूर हों, पशुपालक हों, मछुआरे साथी हों, संगठित क्षेत्र से हों या असंगठित क्षेत्र से… हर तबके के लिए आर्थिक पैकेज में कुछ महत्वपूर्ण फ़ैसलों का ऐलान किया जाएगा। 

कोरोना संकट ने में हमें लोकल मैन्युफैक्चरिंग और लोकल मार्केट का महत्व समझा दिया है। संकट में लोकल ने ही हमारी डिमांड पूरी की है। हमें इस लोकल ने ही बचाया है। लोकल सिर्फ ज़रूरत नहीं, बल्कि हम सबकी ज़िम्मेदारी है। समय ने हमे सिखाया है कि लोकल को हमें अपना जीवन मंत्र बनाना ही  होगा। आज जो आपको ग्लोबल ब्रैंड्स लगते हैं, वे भी कभी लोकल थे, लेकिन जब वहाँ के लोगों ने उनका इस्तेमाल और प्रचार शुरू किया, तो वे प्रोडक्ट्स लोकल से ग्लोबल बन गए। इसलिए आज भारतवासी को अपने लोकल के लिए वोकल बनना है। ना सिर्फ लोकल प्रॉडक्ट खरीदने हैं, बल्कि प्रचार भी करना है। हमारा देश ऐसा कर सकता है। आपके प्रयासों ने आपके प्रति मेरी श्रद्धा को और बढ़ाया है। मैं गर्व के साथ अहसास करता हूँ… जब मैंने देश से खादी खऱीदने को कहा था, तो बहुत ही कम समय में खादी और हैंडलूम दोनों की ही डिमांड, बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। आपने उसे ब्रैंड बना दिया।

साथियों, सभी एक्सपर्ट वैज्ञानिक बताते हैं कि कोरोना लंबे समय तक हमारे जीवन का हिस्सा बना रहेगा, लेकिन साथ ही हम ऐसा भी नहीं होने दे सकते कि हमारी ज़िंदगी कोरोना के इर्द-गिर्द ही सिमट कर रह जाए। हम मास्क पहनेंगे, दो गज की दूरी रखेंगे, लेकिन अपने लक्ष्य दूर नहीं होने देंगे। इसलिए लॉकडाउन का चौथा चरण पूरी तरह नए रंग-रूप वाला होगा और नए नियमों वाला होगा। राज्यों से हमें जो सुझाव मिल रहे हैं, उनके आधार पर लॉकडाउन 4… इससे जुड़ी जानकारी भी आपको 18 मई से पहले दी जाएगी।

मुझे पूरा भरोसा है कि नियमों का पालन करते हुए हम कोरोना से लड़ेंगे भी और आगे भी बढ़ेंगे। हमारे यहाँ कहा गया है ‘सर्वम आत्मवशं सुखम’ यानी जो हमारे वश में है, जो हमारे नियंत्रण में है, वही सुख है। आत्मनिर्भरता हमें सुख और संतोष देने के साथ सशक्त करता है। 21वीं सदी भारत की सदी बनाने का हमारा दायित्व ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प से ही पूरा होगा। इस दायित्व को 130 करोड़ देशवासियों की प्राणशक्ति से ही ऊर्जा मिलेगी। ‘आत्मनिर्भर भारत’ का यह युग हमारे लिए नूतन प्रण भी होगा, नूतन पर्व होगा। नई संकल्प शक्ति लेकर हमें आगे बढ़ना है। जब आचार, विचार, कर्मठता की पराकाष्ठा हो, कर्तव्य भाव से सराबोर हो, कौशल की पूंजी हो, तो ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनने से कौन रोक सकता है। हम भारत को ‘आत्मनिर्भर भारत’ बना सकते हैं। हम भारत को ‘आत्मनिर्भर’ बना कर रहेंगे। मैं आपको बहुत शुभकामनाएँ देता हूँ। आप अपने स्वास्थ्य का अपनों का ज़रूर ध्यान रखिए।