मोदी का फंडा : ‘राम बल’ और ‘श्याम छल’ से निकाल रहे कोरोना का दम…!

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‘रामायण’ ने 16 अप्रैल, 2020 रात 9 बजे बनाया TV इतिहास का वर्ल्ड रिकॉर्ड

हनुमान ने उठाया ‘संजीवनी’ का पहाड़ और ‘रामायण’ ने बना दिया विश्व कीर्तिमान

भारत ही नहीं, अमेरिका सहित पूरे विस्व में छाई रामानंद सागर की ‘रामायण’

WJS ने ‘रामायण’ सहित 80 के धारावाहिकों का किया महिमागान

अब 3 मई रविवार रात 9 बजे से आरंभ होने जा रही ‘कृष्ण’ की लीला

आलेख : कन्हैया कोष्टी/दर्शन मांकड

अहमदाबाद (2 मई, 2020)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 24 मार्च, 2020 को रात 8.00 बजे जब राष्ट्रीय टेलीविज़न चैनल दूरदर्शन (DOORDARSHAN) पर देश में आधी रात से लॉकडाउन (LOCKDOWN) लागू करने की घोषणा कर रहे थे, तब उसी दूरदर्शन का संचालक प्रसार भारती (PRASAR BHARATI) आज से 30-40 वर्ष पुराने धारावाहिकों के भंडार से मोतियाँ चुन रहा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना वायरस (CORONA VIRUS) की चेन तोड़ने के लिए देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की, तो दूसरी तरफ उन्होंने लॉकडाउन का सुचारु, सुगम व सारपूर्ण पालन करवाने का प्रबंध भी कर लिया था, जिससे कोरोना वायरस की चेन तोड़ने की लड़ाई सरल बनाई जा सके तथा कोविड 19 (COVID 19) पर नियंत्रण पाया जा सके।

लॉकडाउन की घोषणा होते ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की निजी व आध्यात्मिक सोच का दर्पण बन कर उभरा प्रसार भारती और उसने अपने लोकप्रिय धारावाहिकों के भंडार से सबसे अधिक लोकप्रिय ‘रामायण’ नामक मोती निकाला। 1987 में दूरदर्शन पर सफलता के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ने व नए रिकॉर्ड बनाने वाले धारावाहिक ‘रामायण’ का इक्कीसवीं शताब्दी के आधुनिक युग में पुन: प्रसारण करने आरंभ किया गया। एक ओर निजी मनोरंजन चैनलों में वर्तमान धारावाहिकों की शूटिंग ठप हो गई और उन्हें पुराने एपिसोड दिखाने पड़े, तो दूसरी ओर दूरदर्शन ने अपने तुणीर से ‘रामायण’ के पश्चात अगला बाण निकाला ‘महाभारत’ का। रामानंद सागर के ‘रामायण’ के बाद 1989 में प्रसारित हुआ बी. आर. चौपड़ा का ‘महाभारत’ धारावाहिक दूसरा लोकप्रिय धारावाहिक था। दूरदर्शन ने ‘महाभारत’ का भी पुन: प्रसारण प्रारंभ कर दिया।

मोदी का फंडा कोरोना की चेन पर सिद्ध हुआ डंडा

नि:संकोच प्रसार भारती ने डीडी नेशनल (DD NATIONAL) तथा डीडी भारती (DD BHARATI) पर ‘रामायण’ व ‘महाभारत’ के साथ 80-99 के दौर के कई लोकप्रिय धारावाहिकों का भी पुन: प्रसारण प्रारंभ किया, परंतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की निजी व आध्यात्मिक विचारधारा का उद्देश्य तो 130 करोड़ भारतीयों का अपने पूर्वजों से परिचय कराना था, अपनी जड़ों से जोड़ना था।

आज की जिस आधुनिक पीढ़ी ने निजी मनोरंजन चैनलों द्वारा टेक्नोलॉजी के माध्यम से उत्कृष्ट शैली में निर्मित ‘रामायण’ व ‘महाभारत’ धारावाहिक देखे थे, परंतु निजी चैनलों का यह प्रयास न पुरानी पीढ़ी को जँचा और न ही नई पीढ़ी को आकर्षित कर सका। ऐसे में इस बात की संभावना बहुत कम लग रही थी कि लोगों को विशेषकर आधुनिक पीढ़ी को 30 वर्ष से अधिक पुराने व अल्प टेक्नोलॉजी संसाधनों के बीच निर्मित ‘रामायण’ व ‘महाभारत’ आकर्षित कर सकेंगे, परंतु मोदी का फंडा काम कर गया।

त्रेता युग के अवतारी पुरुष मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की ‘रामायण’ ने 28 मार्च, 2020 को सुबह 9.00 बजे प्रसारित हुए पहले ही एपिसोड से दर्शकों को जकड़ लिया, तो द्वापर युग के अवतारी पुरुष पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण से युक्त ‘महाभारत’ ने दोपहर 12.00 बजे पुन: दर्शकों को दूरदर्शन के सामने बैठा दिया। पूर्व की भाँति ही ‘रामायण’ ने लोकप्रियता की चरम सीमा को छू लिया, तो ‘महाभारत’ दूसरे स्थान पर रहा। दोनों ही धारावाहिकों की दैनिक प्रसारण अवधि 5 घण्टों के दौरान लोग टीवी से चिपके रहे और मोदी के इस फंडा ने कोरोना की चेन पर जबर्दश्त डंडा मारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

गौरवशाली इतिहास व महान पूर्वजों से परिचय कराने में सफल रहे मोदी

आज की आधुनिक पीढ़ी पर पश्चिमी संस्कृति का ऐसा ज़ुनून सवार है कि युवा वर्ग न भूत से परिचित है, न भविष्य को लेकर चिंतन करता है, न इतिहास जानता है और न ही भूगोल बदलने का सामर्थ्य रखता है। इंटरनेट से लेकर मोबाइल तक के सुविधा-संसाधनों ने युवा वर्ग की भौतिक प्रगति के सहस्त्रों द्वार खोल दिए, परंतु आत्मीय प्रगति के द्वार पर बड़ा ताला जड़ दिया है।

ऐसे में दूरदर्शन पर लॉकडाउन के दौरान जब ‘रामायण’ ने आधुनिक पीढ़ी को दिव्य एवं भव्य भारत के अनेक प्राचीन रहस्यों, सिद्ध व ज्ञानी ऋषि-मुनियों सहित मर्यादा पुरुषोत्तम राम के पुत्र धर्म, पति धर्म, पिता धर्म से लेकर राज धर्म तक जानने का अवसर मिला। नीति-अनीति, धर्म-अधर्म तथा न्याय-अन्याय के कई मानदंडों को परखने का अवसर मिला।

इसी प्रकार ‘महाभारत’ के माध्यम से आधुनिक पीढ़ी 5000 वर्ष से अधिक प्राचीन इस कथा में मोह-माया का दुष्परिणाम तथा ज्ञान के प्रकाश को देखेगी, जब कुरुक्षेत्र की रण भूमि में स्वयं भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को निमित्त बना कर समग्र विश्व को युद्ध की दुंदुभि के मध्य शांति, कर्तव्य, कर्म, धर्म ज्ञान एवं मोक्ष का संदेश देंगे।

कुल मिला कर ‘रामायण’ व ‘महाभारत’ दोनों ही धारावाहिकों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 130 करोड़ भारतीयों को न केवल जड़ से जोड़ दिया, अपितु अपने गौरवशाली इतिहास और महान पूर्वजों से परिचित भी कराने का सफल प्रयोग किया है।

वर्ल्ड रिकॉर्ड बना कर रुका ‘रामायण’ का रथ !

लोकप्रियता के मामले में 33 वर्ष बाद भी ‘रामायण’ ने ही झंडे गाड़े। प्रसारण के पहले ही दिन से ‘रामायण’ ने दर्शकों को बँटोरना आरंभ कर दिया और देखते ही देखते दूरदर्शन की रसातल में रही दर्शकों की संख्या को आकाश तक पहुँचा दिया। सुबह व रात 9.00 बजे दो-दो बार तीन-तीन एपिसोड एक साथ दिखाए जाने के कारण दर्शक राम की मोहिनी में ऐसे बंध गए कि प्रतिस्पर्धा की दौड़ में कहीं पीछे रह चुका डीडी नेशनल अचानक पुन: एक बार लोकप्रियता के शिखर पर पहुँच गया।

लोकप्रियता की इस चरमसीमा ने 16 अप्रैल, 2020 को टेलीविज़न (TELEVISION) इतिहास का एक नया ही विश्व कीर्तिमान (WORLD RECORD) बना दिया। 16 अप्रैल को रात 9.00 बजे प्रसारित हुए ‘रामायण’ धारावाहिक को 7 करोड़ 70 लाख लोगों ने देखा और यह आँकड़ा किसी भी एक धारावाहिक, शो या कार्यक्रम के किसी एक एपिसोड को देखने के मामले में यह नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना।

‘रामायण’ के इस वर्ल्ड रिकॉर्ड को स्थापित करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई राम भक्त हनुमान (दारा सिंह) ने। जी हाँ ! 16 अप्रैल रात 9.00 बजे प्रसारित हुए ‘रामायण’ के तीन एपिसोड में मेघनाद-लक्ष्मण युद्ध, मेघनाद की शक्ति से लक्ष्मण की मूर्छा, लंका से लाए गए वैद्य द्वारा संजीवनी बूटी लाने की सलाह और राम भक्त हनुमान का दक्षिण भारत से उत्तर भारत में हिमालय तक हवा में उड़ कर जाना, संजीवनी बूटी वाला पर्वत उठा कर रातों-रात लंका लौटना और चेतना में आए लक्ष्मण से पुन: युद्ध करने जा रहे मेघनाद का रावण से संवाद आदि प्रसंग दर्शाए गए थे। स्पष्ट है कि ‘रामायण’ के इन तीन एपिसोड में पवनपुत्र हनुमान ही छाए रहे।

हनुमान ने पहले तो लंका से वैद्य को उनके घर सहित उठा कर राम के शिविर में लाने का पराक्रम किया। इसके बाद मारुति नंदन ने वैद्य के निर्देशानुसार सूर्योदय से पूर्व हिमालय से संजीवनी बूटी वाला पहाड़ लाने का महान पराक्रम किया। स्पष्ट है कि हनुमान के कारण ही ‘रामायण’ 16 अप्रैल की रात 9.00 बजे यह वर्ल्ड रिकॉर्ड बना सका। यद्यपि आज 2 मई, 2020 रात 9.00 बजे ‘उत्तर रामायण’ के समापन के साथ ही ‘रामायण’ का रथ ठहर जाएगा।

अमेरिका सहित विश्व भर में चर्चित हुआ ‘रामायण’

‘रामायण’ ने लोकप्रियता के मामले में सफलता के कई शिखरों को छुआ। इतना ही नहीं, पीएम मोदी के लॉकडाउन को सफल बनाने के फंडा यानी 80 के दशकों के धारावाहिकों के पुन: प्रसारण की नीति की भारत ही नहीं, पूरे विश्व में चर्चा हो रही है। इसमें भी सर्वाधिक चर्चा ‘रामायण’ की हुई। अमेरिका के प्रमुख समाचार पत्र ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (THE WALL STREE JOURNAL) यानी WSJ ने तो 80-90 के दशकों के धारावाहिकों पर एक बड़ा आर्टिकल भी प्रकाशित किया।

इस आलेख में 80 के दशकों के कई धारावाहिकों का उल्लेख था, परंतु सर्वाधिक चर्चा ‘रामायण’ की ही गई कि किस प्रकार लॉकडाउन को सफल बनाने में ‘रामायण’ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अमेरिका सहित पूरे विश्व में रहने वाले भारतीयों ने भी दूरदर्शन पर ‘रामायण’ व ‘महाभारत’ जैसे धारावाहिकों के प्रसारण किए जाने पर हर्ष व्यक्त किया और पूरे परिवार के साथ इन दोनों धारावाहिकों का आनंद व उपदेश का लाभ उठाया जा रहा है।

मर्यादा पुरुषोत्तम राम का उत्तरदायित्व अब छलिया कृष्ण पर

दूरदर्शन पर ‘रामायण’ दूसरी बार अपनी सर्वश्रेष्ठता व विराट लोकप्रियता को सिद्ध कर विदा हो रहा है, तो 3 मई, 2020 से दर्शकों को बांधे रखने के लिए प्रसार भारती रामानंद सागर की एक और अनुपम कृति ‘कृष्ण’ (KRISHNA) का पुन: प्रसारण प्रारंभ करने जा रहा है। 1993 में प्रसारित हुए ‘कृष्ण’ में रामानंद सागर ने द्वापर युग में अवतरित हुए भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप, लीलाओं से लेकर रणभूमि में दिए गए गीता उपदेश को समाहित किया है।

‘कृष्ण’ धारावाहिक 3 मई रविवार रात 9.00 बजे से आरंभ होने जा रहा है। ऐसे में ‘राम बल’ से लॉकडाउन को सफल बनाने का मोदी के फंडा को आगे बढ़ाने का उत्तरदायित्व अब ‘श्याम छल’ पर आ गया है। दूरदर्शन पर ‘महाभारत’ में एक कृष्ण (नितिश भारद्वाज) पहले ही छाए हुए हैं, तो रविवार से ‘कृष्ण’ में कृष्ण का एक और नया रूप (स्वप्निल जोशी) देखने को मिलेगा।

स्वप्निल जोशी वही हैं, जिन्होंने 2 मई को सम्पन्न ‘उत्तर रामायण’ में कुश की भूमिका निभाई है। वही स्वप्निल जोशी 3 मई से आरंभ हो रहे ‘कृष्ण’ धारावाहिक दर्शकों के समक्ष कृष्ण के रूप में प्रकट होंगे।

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