आरंभ हो चुकी रूपाणी की विजय यात्रा : कोरोना के भयावह आँकड़ों में ही छिपा है गुजरात की ‘सफलता’ का रहस्य….

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स्वस्थ होने वालों की संख्या में एक ही दिन में 10 गुना वृद्धि

संक्रमितों की अधिकता के पीछे भी रूपाणी की सूझ-बूझ

कोने-कोने से ढूँढे जा रहे तबलिग़ी जमात के कोरोना कॅरियर्स

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद (4 मई, 2020)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य और भारतीय जनता पार्टी (BJP-बीजेपी) का गढ़ गुजरात (GUJARAT) प्राय: समृद्धि, औद्योगिक विकास, जागृति एवं नंबर वन की रेस के घोड़े का प्रतीक रहा है। जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब प्राय: कई क्षेत्रों में गुजरात को नंबर वन के तमगे मिलते रहते थे, परंतु वर्तमान में यही गुजरात ‘नंबर वन’ की उपाधि-उपमा से स्वयं को बचाने के लिए जूझ रहा है।

कोरोना वायरस (CORONA VIRUS) के कारण फैली वैश्विक महामारी कोविड 19 (COVID 19) ने भारत पर भी भयंकर आक्रमण किया है और सर्वाधिक प्रभावित राज्यों की सूची में नंबर वन पर महाराष्ट्र है। बृहन्मुंबई से 1 मई, 1960 को बने गुजरात एवं महाराष्ट्र दोनों ही अपनी स्थापना के समय से ही एक-दूसरे के कट्टर प्रतिस्पर्धी रहे हैं और कई मामलों में गुजरात ने महाराष्ट्र (MAHARASHTRA) को पीछे भी छोड़ा है, परंतु वर्तमान परिस्थितियों में जब महाराष्ट्र कोरोना संक्रमण के मामले में शीर्ष पर है, तब गुजरात अचानक व अनायास ही महाराष्ट्र के साथ मानों रेस में आ गया।

जिस गुजरात में 20 मार्च को कोरोना संक्रमण के केवल 5 मामले थे, उसी गुजरात में 30 दिनों में ही अर्थात् 20 अप्रैल को 1,939 पर पहुँच गई। इतना ही नहीं, 3 मई तक यह आँकड़ा 5,428 पर पहुँच गया। कुल मिला कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित लॉकडाउन (LOCKDOWN) से पहले अर्थात् 20 मार्च से लेकर लॉकडाउन लागू होने के बावज़ूद 3 मई तक गुजरात में कोरोना संक्रमण में 1000 गुना (1,08,560 प्रतिशत) की अति भारी वृद्धि हुई और गुजरात महाराष्ट्र के बाद दूसरे स्थान पर आ गया।

गुजरात अचानक क्यों बन गया कोरोना हॉटस्पॉट ?

जब पूरे देश में महाराष्ट्र को छोड़ कर शेष राज्यों में कोरोना संक्रमण की वृद्धि दर लॉकडाउन के चलते नीचे जा रही थी, तो गुजरात अचानक क्यों और कैसे कोरोना हॉटस्पॉट बन गया। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी (VIJAY RUPANI) के नेतृत्व में राज्य सरकार कोरोना विरोधी युद्ध में पूरा दम-खम लगा रही है, तो क्या कारण था कि लॉकडाउन लागू होने के बाद व बावज़ूद भी गुजरात में कोरोना इतनी तीव्रता से फैला ?

इन प्रश्नों के उत्तर में जहाँ राज्य सरकार की स्वास्थ्य सचिव जयंती रवि (JAYANTI RAVI) ने गुजरात में कोरोना वायरस के L Type को उत्तरदायी ठहराया। कोरोना वायरस के दो प्रकार हैं L व S, जिनमें एल टाइप कोरोना न केवल अत्यंत तीव्रता से फैलता है, वरन् अति प्राणघातक भी होता है। रवि का कहना था कि गुजरात में कोरोना संक्रमण का प्राथमिक कारण अमेरिका से आने वाले लोग हैं और अमेरिका में यही एल टाइप कोरोना वायरस फैला हुआ है, जहाँ मृतकों की संख्या 70 हज़ार के निकट पहुँच रही है।

यह एल टाइप कोरोना ही गुजरात में संक्रमण के मामले तथा मृतकों की संख्या बढ़ाने वाला सिद्ध हो रहा है। 3 मई तक गुजरात में कोरोना से मरने वालों की संख्या 290 पर पहुँच चुकी है।

बिल में छिपे तबलीग़ियों को ढूँढने में जुटी सरकार

गुजरात में कोरोना संक्रमण में भारी वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान आर्थिक राजधानी अहमदाबाद का है और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने इसके लिए तबलीग़ी जमात के लोगों को उत्तरदायी ठहराया है। रूपाणी ने पिछले दिनों एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा था, ‘यह बात काफी हद तक सही है कि तबलीग़ी जमात की घटना के बाद राज्य में विशेष तौर पर अहमदाबाद में संक्रमण के मामले काफी बढ़े हैं। यद्यपि हमने इससे होने वाले नुकसान को कम से कम करने की कोशिश की है, परंतु अब जो स्थिति सामने आ चुकी है, उसे हमें हल करना ही होगा।’

वास्तव में गुजरात में कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या में कुल 5,428 में से 3,817 मामलों के साथ अहमदाबाद सबसे बड़ा कारण बना है। अहमदाबाद में कोरोना संक्रमण के मामले इसलिए बढ़े, क्योंकि राज्य सरकार तथा अहमदाबाद महानगर पालिका (AMC) ने दिल्ली के मरकज़ में भाग लेकर लौटे व अहमदाबाद में बिल में जा छिपे तबलीग़ियों को ढूँढ-ढूँढ कर निकाला और उनका टेस्ट किया।

टेस्ट की संख्या तीव्रता से बढ़ी और दिल्ली से कोरोना कॅरियर बन कर आए तबलीग़ियों के कारण अहमदाबाद व गुजरात में कोरोना संक्रमितों की संख्या अचानक बढ़ने लगी। अहमदाबाद की महापौर बीजल पटेल (BIJAL PATEL) एवं महानगर पालिका आयुक्त विजय नेहरा (VIJAY NEHRA) के नेतृत्व में तबलीग़ियों को ढूँढने का सफल अभियान चलाया गया।

अब दिखने ले हैं रूपाणी की विजय यात्रा के आसार

मुख्यमंत्री विजय रूपाणी तथा उनके नेतृत्व में समूचा शासन-प्रशासन गुजरात को कोरोना पर विजय दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत् हैं। गुजरात में कोरोना संक्रमितों के उपचार के लिए साधारण नागरिक से लेकर साधन-सम्पन्न नागरिकों तक के लिए कई स्तर पर अस्पताल आदि की व्यवस्थाएँ की गई हैं, जिसमें निर्धनों को नि:शुल्क उपचार की सुविधा का भी समावेश होता है।

मंत्री, विधायक, पार्षद से लेकर पंचायत सदस्य तक के जनप्रतिनिधि पर्दे के पीछे कोरोना विरोधी लड़ाई लड़ रहे हैं, तो मुख्य सचिव अनिल मुकीम (ANIL MUKIM), मुख्यमंत्री के सचिव अश्वनी कुमार (ASHWANI KUMAR) तथा स्वास्थ्य सचिव जयंती रवि से लेकर पटवारी तक के अधिकारी, सभी विभागों के कर्मचारी, सरकारी-निजी डॉक्टर, नर्स तथा लॉकडाउन का पालन कराने वाले पुलिस महानिदेशक (DGP) शिवानंद झा (SHIVANAND JHA) से लेकर सिपाही तक के लोग रणभूमि पर कोरोना को मात देने में जुटे हुए हैं। इन कठोर अनशासन, परिश्रम व प्रयासों के चलते अब रूपाणी की विजय यात्रा आरंभ होने के आसार दिखाई देने लगे हैं।

एक सप्ताह के आँकड़ों से समझिए रूपाणी की सफलता

नि:संदेह गुजरात में कोरोना संक्रमितों की संख्या में वृद्धि की तीव्रता में विशेष क़मी नहीं आई है, परंतु पिछले एक सप्ताह में कोरोना विरोधी युद्ध में विजयी होने वालों की संख्या में निरंतर वृद्धि से लगता है कि रूपाणी का विजय अभियान अब आरंभ हो चुका है।

गत 27 अप्रैल से 3 मई तक के कोरोना संबंधी आँकड़ों में यदि केवल रिकवर करने वालों की संख्या पर ध्यान दिया जाए, तो सर्वाधिक उत्साहजनक दिन 3 मई का रहा। गुजरात में 3 मई तक कोरोना विरोधी युद्ध से विजय प्राप्त करने वालों का आँकड़ा 1,042 पर पहुँच गया। यह रिकवरी रेट 24 घण्टों में ही 1000 गुना बढ़ा है।

2 मई को जहाँ कुल रिकवर केसों की संख्या 735 थी, वहीं 3 मई को इस संख्या में 307 की वृद्धि हुई। वास्तव में 2 मई को 1 मई के मुक़ाबले केवल 36 लोग स्वस्थ होकर घर लौटे थे, तो 3 मई को स्वस्थ होने वालों का आँकड़ा 1000 गुना बढ़ कर 307 पर पहुँच गया।

देखिए गुजरात कैसे उठ खड़ा होने जा रहा है ?

27 अप्रैल : 394 लोग कोरोना मुक्त हुए थे यानी 26 अप्रैल को रिकवर हुए केस 313 में 27 अप्रैल को 81 की वृद्धि हुई थी।

28 अप्रैल : कोरोना मुक्त लोगों की संख्या 434 पर पहुँची यानी 24 घण्टों में 40 लोग स्वस्थ हुए।

29 अप्रैल : स्वस्थ होने वालों की संख्या 527 हुई अर्थात् 24 घण्टों में 93 लोग कोरोना मुक्त हुए।

30 अप्रैल : कुल 613 लोग कोरोना मुक्त हुए अर्थात् 24 घण्टों में 86 लोग स्वस्थ हुए।

1 मई : कोरोना विजयियों की संख्या 699 हुई यानी 24 घण्टों में 86 लोग अस्पताल से डिसचार्ज हुए।

2 मई : कोरोना को हराने वालों की संख्या 735 पर पहुँची अर्थात् 24 घण्टों में 36 लोग कोरोना से मुक्त हुए।

3 मई : कोरोना को परास्त करने वालों का आँकड़ा 1,042 पर पहुँचा अर्थात् 24 घण्टों में रिकॉर्ड 307 लोग स्वस्थ हुए।

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