CORONA : अमेरिका ही नहीं, 121 देशों के लक्ष्य पर है चीन, भारत का भी बड़ा कूटनीतिक दाव, देखिए विरोधियों की पूरी LIST

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ड्रैगन को दंडित करने की हो रही तैयारी

WHO में EU का कोरोना जाँच प्रस्ताव

ऑस्ट्रेलिया बना प्रस्ताव का सह-प्रस्तोता

भारत का समर्थन, पाकिस्तान का पलायन

रूस ने भी किए प्रस्ताव पर हस्ताक्षर

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद (18 मई, 2020)। पूरे विश्व में जहाँ एक ओर वैश्विक महामारी कोविड 19 के विरुद्ध स्वास्थ्य क्षेत्र में युद्ध चल रहा है, वहीं कोरोना (CORONA) वायरस की उत्पत्ति को लेकर अमेरिका और चीन के बीच वाग्युद्ध किसी भी समय सशस्त्र युद्ध में बदलने की तैयारी में है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) हर दिन चीन के विरुद्ध कोई न कोई वक्तव्य दे रहे हैं, तो ट्रम्प प्रशासन चीन के विरद्ध कड़े निर्णय भी कर रहा है। दूसरी तरफ से अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने चीन के विरुद्ध मोर्चा खोल रखा है।

अमेरिका जहाँ कोरोना वायरस को बार-बार चीनी वायरस एवं वुहान वायरस कह कर चीन को कड़ा सबक सिखाने की फिराक में है, वहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) अमेरिका के हर वार-प्रहार-आरोप का प्रत्युत्तर दे रहे हैं। जिनपिंग को उनके मित्र राष्ट्र रूस एवं राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भी समर्थन मिल रहा है।

यद्यपि कोरोना वायरस को लेकर अब तक लोगों को यही लग रहा था कि केवल अमेरिका ही अपने मित्र राष्ट्रों के साथ चीन के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, परंतु ऐसा नहीं है। वास्तव में विश्व के 60 प्रतिशत से अधिक देश कोरोना संक्रमण के लिए चीन को उत्तरदायी मानते हुए एकजुट हो गए हैं।

जी हाँ ! विश्व के 192 देशों में से 121 देश चाहते हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और यही मांग करने वाला एक प्रस्ताव विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) अर्थात् WHO के समक्ष लाया गया है। इस प्रस्ताव के आने के साथ ही विश्व के चीन विरोधी गुटों में शामिल देशों के नामों का ख़ुलासा हो गया है।

निर्भय भारत निष्पक्ष जाँच के पक्ष में, कायर पाकिस्तान का पलायनवाद

स्वाभाविक रूप से भारत भी कोरोना संक्रमण की निष्पक्ष जाँच चाहता है और यही कारण है कि चीन पड़ोसी व अधिक शक्तिशाली देश होने के पश्चात् भी भारत ने डब्ल्यूएचओ में लाए जा रहे इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। दूसरी तरफ यह भी स्वाभाविक ही है कि कंगालियत के बीच चीन के भरोसे ज़िंदा पाकिस्तान ने कोरोना संक्रमण की निष्पक्ष जाँच के मामले से पलायनवाद का सहारा लिया है।

वास्तव में 18 मई से डब्ल्यूएचओ की विश्व स्वास्थ्य सभा (World Health Assembly) अर्थात् WHA होने जा रही है। सभा से पूर्व यूरोपीय संघ (European Union) अर्थात् EU ने डब्ल्यूएचए के समक्ष कोरोना संक्रमण की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जाँच की मांग करता हुआ प्रस्ताव प्रस्तुत किया है।

प्रस्ताव में चीन-वुहान का उल्लेख नहीं, अमेरिका ने नहीं किए हस्ताक्षर

डब्ल्यूएचए के समक्ष लाए गए इस प्रस्ताव की दो विशेषताएँ हैं। पहली यह कि इस प्रस्ताव में कहीं भी चीन या वुहान या चीनी वायरस या वुहान वायरस जैसे शब्दों का उल्लेख नहीं है। प्रस्ताव में केवल कोरोना संक्रमण की निष्पक्ष जाँच की मांग की गई है। दूसरी विशेषता यह है कि इस प्रस्ताव पर चीन एवं अमेरिका ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जबकि दोनों के बीच इसी जड़ को लेकर जंग की नौबत आन पड़ी है।

मोदी का जिनपिंग के विरुद्ध बड़ा कूटनीतिक दाव

ऑस्ट्रेलिया (Australia) अनुमोदित ईयू के प्रस्ताव पर विश्व के कुल 121 देशों के हस्ताक्षर हैं, जिनमें भारत शामिल है। भारत ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर बड़ा कूटनीतिक दाव खेला है। कोरोना संक्रमण के बाद से ही चीन ने भारत से लगी सीमा पर विवाद व घुसपैठ जैसी गतिविधियाँ बढ़ा दी हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह दाव चीन पर दबाव बनाने में कारगर सिद्ध होगा।

दूसरी ओर भले ही प्रस्ताव में चीन या वुहान का नाम नहीं है, परंतु स्वाभाविक रूप से कोरोना की जड़ें चीन विशेषकर वुहान से जुड़ी हुई हैं। इसीलिए प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में पाकिस्तान (Pakistan) का नाम नहीं है। इमरान ख़ान (Imran Khan) जानते हैं कि यह हस्ताक्षर जिनपिंग को नाराज़ कर सकते हैं।

रूस ने क्यों किए प्रस्ताव पर हस्ताक्षर ?

यद्यपि चीन के सबसे निकटस्थ मित्र राष्ट्र रूस (Russia) ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं, जो एक उत्तरदायी राष्ट्र का प्रतीक है। वैसे भी कोरोना संक्रमण के मामले में विश्व में अमेरिका के बाद रूस का ही नंबर आता है। इतना ही नहीं, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) भी यही चाहते हैं कि कोरोना की उत्पत्ति की निष्पक्ष जाँच हो और उनका मित्र चीन निर्दोष सिद्ध हो, ताकि वे अमेरिका व ट्रम्प के आरोपों को झूठे सिद्ध करने में सफल हों।

ये हैं वे 121 देश, जिन्होंने प्रस्ताव पर किए हस्ताक्षर :

the European Union and its Member States

Austria
Belgium
Bulgaria
Croatia
Cyprus
Czech Republic
Denmark
Estonia
Finland
France
Germany
Greece
Hungary
Ireland
Italy
Latvia
Lithuania
Luxembourg
Malta
Netherlands
Poland
Portugal
Romania
Slovakia
Slovenia
Spain
Sweden

Other Nations

Albania
Australia
Bangladesh
Belarus
Bhutan
Brazil
Canada
Chile
Colombia
Djibouti
Dominican Republic
Ecuador
El Salvador
Guatemala
Guyana
Iceland
India
Indonesia
Japan
Jordan
Kazakhstan
Malaysia
Maldives
Mexico
Monaco
Montenegro
New Zealand
North Macedonia
Norway
Paraguay
Peru
Qatar
Republic of Korea
Republic of Moldova
Russian Federation
San Marino
Saudi Arabia
Turkey
Ukraine
United Kingdom of Great Britain
Northern Ireland

the African Group and its Member States

Algeria
Angola
Benin
Botswana
Burkina Faso
Burundi
Cape Verde
Cameroon
Central African Republic
Chad
Comoros
Congo
Côte D’Ivoire
DR Congo
Egypt
Equatorial Guinea
Eritrea
Ethiopia
Eswatini
Gabon
Gambia (Republic of The)
Ghana
Guinea
Guinea-Bissau
Kenya
Lesotho
Liberia
Libya
Madagascar
Malawi
Mali
Mauritania
Mauritius
Morocco
Mozambique
Namibia
Niger
Nigeria
Rwanda
São Tomé and Príncipe
Senegal
Seychelles
Sierra Leone
Somalia
South Africa
South Sudan
Sudan
Togo
Tunisia
Uganda
United Republic of Tanzania
Zambia
Zimbabwe