MODI@2192 : ‘दो’बारा कमान, ‘एक’निष्ठ भक्ति, ‘नव’क्रांतिकारी निर्णय और ‘दो’हरी शक्ति

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विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद (26 मई, 2020)। ‘मैं नरेन्द्र दामोदरदास मोदी…’ ठीक 2 हजार 192 दिवस पूर्व भारत के इतिहास में पहली बार ये शब्द तथा उनसे बना यह वाक्य जन-जन के कानों में गूंज उठा था। 130 करोड़ भारतीयों ने कोटि-कोटि आकांक्षाओं के साथ जिस व्यक्ति को राष्ट्र का कर्णधार बनाया था, उसने गुजरात में चार बार कहे गए ‘हूँ नरेन्द्र दामोदरदास मोदी…’ को पूरे 4610 दिनों के बाद ‘मैं नरेन्द्र दामोदरदास मोदी…’ में परिवर्तित करने का महापराक्रम किया था।

जी हाँ ! हम बात कर रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी की, जिन्होंने आज से ठीक छह वर्ष पूर्व यानी 26 मई, 2014 को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में ‘मैं नरेन्द्र दामोदरदास मोदी…’ के उद्घोष के साथ पद एवं गोपनीयता की शपथ ली थी। मोदी की यह शपथ असाधारण थी, क्योंकि इसकी पृष्ठभूमि में जहाँ पहली बार कांग्रेसमुक्त किसी एक दल को पूर्ण बहुमत मिला था तथा पूरे 30 वर्ष पश्चात् राष्ट्र ने किसी एक दल को पूर्ण बहुमत दिया था। यह दोनों रिकॉर्ड बने थे मोदी की असाधारण लोकप्रियता के कारण। नरेन्द्र मोदी की यह शपथ इसलिए भी असाधारण थी, क्योंकि उनके समक्ष 130 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं, राष्ट्र का स्वाभिमान, राष्ट्रीय सुरक्षा सहित कई चुनौतियों का अंबार था।

शरीर का कण-कण व समय का क्षण-क्षण राष्ट्र को समर्पित

नए भारत के संकल्प के साथ 26 मई, 2014 को राष्ट्र की कमान संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल के आज 2192 दिवस पूर्ण हो चुके हैं। यदि इन दिनों को अन्य गणनाओं में परिवर्तित करें, तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पिछले 72 महीनों से राष्ट्र की सेवा में जुटे हुए हैं, जिसमें 313 सप्ताहों का समावेश होता है। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के रूप में प्रचार अभियान के दौरान नरेन्द्र मोदी प्राय: यह कहते थे, ‘मेरे शरीर का कण-कण और समय का क्षण-क्षण इस राष्ट्र को समर्पित रहेगा।’

मोदी ने यह कथन प्रधानमंत्री बनने के बाद भी न केवल बार-बार दोहराया, अपितु चरितार्थ भी किया। 26 मई, 2014 से लेकर आज तक पीएम मोदी को किसी ने अक्रिय या निष्क्रिय अवस्था में नहीं देखा। इन 2192 दिनों को यदि समय में परिवर्तित किया जाए, तो नरेन्द्र मोदी 52 हज़ार 6 सौ 8 (52,608) घण्टों अर्थात् 31 लाख 56 हज़ार 4 सौ 80 मिनटों (31,56,480) अर्थात् 18 करोड़ 93 लाख 88 हज़ार 8 सौ (18,93,88,800) सेकंड्स से अपने शरीर का कण-कण और समय का क्षण-क्षण राष्ट्र की सेवा में लगा रहे हैं।

‘चौबारा से दोबारा से कोरोना’ तक : संकल्प, संघर्ष, सामर्थ्य व शक्ति का पुंज

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब 26 मई, 2014 को भारत के कर्णधार के रूप में शपथ ली, तब उन्होंने पहली बार गुजरात की 182 सदस्यीय ‘वामन’ विधानसभा के चौबारे से देश की 542 सदस्यीय ‘विराट’ लोकसभा में प्रवेश किया था। 6 करोड़ गुजरातियों के चौबारे से निकले नरेन्द्र मोदी ने 130 करोड़ भारतीयों के विशाल दरबार में पग धरते ही तत्कालीन भारत में व्याप्त निराशाओं को आशाओं में परिवर्तित कर दिया।

यही कारण है कि भारत ने नरेन्द्र मोदी को लोकसभा चुनाव 2019 में दोबारा प्रधानमंत्री के रूप में चुना और आज मोदी के कार्यकाल को 6 वर्ष पूर्ण हुए। इन 6 वर्षों में नरेन्द्र मोदी 130 करोड़ भारतीयों के संकल्प, संघर्ष सामर्थ्य व शक्ति के पुंज के रूप में प्रतिबिंबित हुए। गुजरात के चौबारे से दोबारा प्रधानमंत्री बनने तक की यात्रा के छठे वर्ष में जब राष्ट्र अचानक कोरोना जैसे महासंकट में घिर गया, तब भी नरेन्द्र मोदी के मुख से कभी निराशाजनक शब्द नहीं निकले।

छह वर्षों में अनेक चुनौतियों को मात देने वाले मोदी ने असाध्य कोरोना बीमारी के विरुद्ध भी हार न मानते हुए आत्मनिर्भर भारत के रूप में 130 करोड़ देशवासियों में निराशा व हताशा के वातावरण में आशा की एक नई किरण जगाई।

एकनिष्ठ सेवा से जन-जन में जगाया विश्वास

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन छह वर्षों में निरंतर एकनिष्ठ सेवा से जन-जन में न केवल अपने प्रति विश्वास जगाया, वरन् लोगों के भीतर भी आत्म-विश्वास की लौ जलाई। छह वर्षों में मोदी ने प्रथम कार्यकाल में जहाँ जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना जैसी अनेक लोककल्याणकारी योजनाओं से लोगों मैं यह आशा जगाई, ‘जो भी हो, करेगा तो मोदी ही।’

कांग्रेस सहित सभी विरोधी राजनीतिक दलों की घरेलू चुनौतियों के बीच भी मोदी ने सेवा की ऐसी अलख जगाई कि एक-एक नागरिक के लिए धर्म, जाति, प्रांत जैसे वादों से परे ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ बन गया। यही कारण है कि राष्ट्र ने मोदी को इन सभी बाड़ों को तोड़ कर 2019 में दोबारा प्रधानमंत्री बनाया।

ट्रिपल तलाक और 370 का सदा के लिए अंत, CAA पर अटल

अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 6 वर्ष के कार्यकाल को निर्णयों की तुला पर तोला जाए, तो पहले मोदी ने कार्यकाल में जहाँ अल्पसंख्यक समुदाय की आधी आबादी को सदियों से सताने वाली ट्रिपल तलाक़ की समस्या से निजात दिलाई गई, वहीं सीमा पर सताने वाले ग़ुस्ताख़ पाकिस्तान व उसके द्वारा प्रायोजित आतंकवाद की ऐसी कमर तोड़ी कि वह पानी मांगने के लायक भी नहीं रहा।

पहले कार्यकाल में मोदी ने जहाँ उड़ी आतंकवादी आक्रमण का प्रतिशोध पाकिस्तान में घुस कर सर्जिकल स्ट्राइक करके लिया, वहीं दूसरे कार्यकाल में पुलवामा आतंकवादी आक्रमण का प्रत्युत्तर एयर स्ट्राइक करके लिया। इन स्ट्राइक की मार से अभी पाकिस्तान उठ खड़ा होता, उससे पहले ही मोदी ने 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटा कर ऐसी कश्मीर क्रांति की कि कश्मीर समस्या ही समाप्त हो गई। इतना ही नहीं, मोदी ने नागरिक संशोधन अधिनियम (CAA) को भी घरेलू विरोधों के बावज़ूद अडिगता के साथ लागू कर दिया, जिससे पड़ोसी देशों में अत्याचार के शिकार लाखों हिन्दुओं सहित सहित अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा हुई।

पाकिस्तान की दुर्दशा, चीन की अवदशा

अब पाकिस्तान भी यह मान चुका है कि भारत के साथ कश्मीर पर नहीं वह कोई चर्चा नहीं कर पाएगा, वरन् उसे भारत के हिस्से वाले कश्मीर (PoK) खो देने का भी भय सता रहा है। मोदी ने छह वर्षों में पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी दुर्दशा कर दी कि आज चीन को छोड़ कर पूरी दुनिया उसे एक आतंकवादी राष्ट्र के रूप में देखती है।

छह वर्षों के कार्यकाल में मोदी को एक और शत्रु पड़ोसी चीन से भी बार-बार लोहा लेना पड़ा। भारत से अधिक शक्तिशाली होने के पश्चात् भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने इस कथन पर अडिग रहे कि भारत न आँख झुका कर बात करेगा, न आँख उठा कर बात करेगा, भारत आँख मिला कर बात करेगा। यही कारण है कि डोकलाम विवाद में चीन जैसे शक्तिशाली राष्ट्र को पीछे हटना पड़ा। मोदी के छह वर्ष के समापन व सातवें वर्ष के आगमन के बीच चीन फिर सिर उठा रहा है।

‘आत्मनिर्भर भारत’ ने उड़ाई चीन की नींद

यद्यपि भारत को फिर भी चिंता नहीं है, क्योंकि वास्तविकता यह है कि भारतीय सीमाओं में अतिक्रमण के पीछे चीन के दो उद्देश्य हैं। पहला यह कि कोरोना वायरस संक्रमण के आरोपों से घिरा चीन विश्व का ध्यान हटाना चाहता है और दूसरा उससे भी बड़ा कारण है मोदी का ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान, जिसने चीन की नींद उड़ा दी है। कोरोना संक्रमण के चलते चीन से विदेशी कंपनियाँ भाग रही हैं और उनके लिए सबसे सुदृढ़ व सुलभ-सुगम विकल्प भारत बन रहा है।

इसी बौखलाहट के कारण चीन ग़ुस्ताख़ियाँ कर रहा है, जिसे क़रारा जवाब भी दिया जा रहा है, परंतु मोदी जैसे सक्षम व शक्तिशाली नेतृत्व के आगे चीन भारत के साथ युद्ध का दुस्साहस करने की भूल कदापि नहीं करेगा।

450 वर्ष पुराना राम मंदिर विवाद समाप्त

मोदी के छह वर्ष के कार्यकाल में भारत को एक और नासूर बनी समस्या से मुक्ति मिल गई। पिछले 450 वर्षों से भारत के 100 करोड़ हिन्दुओं की आस्था से जुड़ा राम मंदिर विवाद हल हो गया। यह मोदी की ही युक्ति का परिणाम है कि उच्चतम् न्यायालय ने राम मंदिर के पक्ष में निर्णय सुनाया और देश के 25 करोड़ मुसलमानों के समक्ष देश की सबसे बड़ी अदालत का निर्णय मानने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं था।

पूरा विश्व भारत के आगे नतमस्तक, मसूद को मात

छह वर्षों में मोदी ने विदेश नीति पर इतना धारदार कार्य किया, जिसका कोई तोड़ नहीं है। मोदी ने भले ही विदेश यात्राओं का रिकॉर्ड बनाया हो और विरोधियों ने आलोचना की हो, परंतु जब अंतरराष्ट्रीय समर्थन की नौबत आई, तो मोदी की ये विदेश यात्राएँ ही भारत के काम आई।

उदाहरण के रूप में भारत ने दो-दो बार पीओके में घुस कर सर्जिकल स्ट्राइक व एयर स्ट्राइक की, तो उसका अमेरिका सहित पूरे विश्व ने समर्थन किया। मोदी को उससे भी बड़ी कूटनीतिक सफलता तब मिली, जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) में मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करवाने में यूएनएससी के पाँच में से चार राष्ट्रों का समर्थन मिला। एकमात्र चीन का पाकिस्तान समर्थन व भारत विरोध काम नहीं आया और मसूद अज़हर अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित हो गया।

सातवें वर्ष की सबसे बड़ी कसौटी कोरोना

मोदी के सातवें वर्ष का कार्यकाल कोरोना संक्रमण की चुनौतियों के साथ प्रारंभ हो रहा है। कोरोना विरोधी युद्ध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संकल्प शक्ति के कारण ही आज भारत में स्थिति अन्य देशों की तुलना में नियंत्रित है, परंतु संक्रमण के आँकड़ों को ही आधार मानना अतिश्योक्ति होगी।

वास्तविकता यह है कि मोदी के सक्षम नेतृत्व के चलते 130 करोड़ भारतीयों में कोरोना संक्रमण महामारी के निराशाजनक वातावरण में भी उत्साह बना हुआ है। इसका सटीक प्रमाण है मोदी की जनता कर्फ्यू, लॉकडाउन, ध्वनिनाद, दीप प्रज्ज्वलन सहित सभी अपीलों का जनता में सकारात्मक प्रभाव। भले ही इन प्रयासों से कोरोना पर अंतिम विजय न मिली हो, परंतु विजय संकल्प का साहस अवश्य जन-जन में भरने में मोदी सफल रहे हैं।