‘कुछ’ लोग तो कहेंगे : संजीवनी है तालाबंदी, इसीलिए LOCKDOWN 5.0 का आना निश्चित है..

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LOCKDOWN 4.0 का काउंटडाउन, जून में कैसा होगा जीवन ?

क्या PM अब CM-DM को सौंपेंगे LOCKDOWN की लगाम ?

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद (28 मई, 2020)। बॉलीवुड के प्रथम सुपर स्टार राजेश खन्ना की फिल्म ‘अमर प्रेम’ के एक गीत की पंक्ति है, ‘कुछ तो लोग कहेंगे… लोगों का काम है कहना…’। आज इस पंक्ति का उल्लेख, वह भी शब्दों को उलट-पुलट करते हुए उल्लेख करने की इसलिए आवश्यकता पड़ी, क्योंकि हमारे देश में ‘कुछ तो लोग कहेंगे’ और ‘कुछ लोग तो कहेंगे’ दोनों ही श्रेणी में आने वाले लोग हैं, परंतु जहाँ तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रश्न है, वे राष्ट्र हित तथा जन हित के मामलों में दोनों ही श्रेणी के आलोचकों की चिंता नहीं करते।

भारत (INDIA) सहित पूरा विश्व जब कोरोना वायरस से फैली वैश्विक महामारी कोविड 19 से त्रस्त है, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (NARENDRA MODI) के नेतृत्व में पूरा देश और राज्यों की सरकारें इस महामारी से लोगों के प्राणों की रक्षा करने के अभियान में जुटे हैं। ऐसे संकट काल में भी सोशल मीडिया पर जहाँ ‘कुछ लोग लोग कहेंगे’ वालों की बाढ़ आई हुई है, वहीं राजनीति में ‘कुछ लोग तो कहेंगे’ वाले ‘कुछ’ लोग केवल इसलिए ‘कुछ’ कह रहे हैं, क्योंकि वे आपत्ति काल में भी राजनीतिक अवसर की खोज में हैं।

धैर्य, विवेक व परिपक्वता की कसौटी में फिर फेल हुए राहुल

जी हाँ ! हम बात कर रहे हैं देश में 25 मार्च, 2020 से लागू लॉकडाउन (LOCKDOWN) पर प्रश्नचिह्न लगाने वालों की, जिनमें सबसे ऊपर हैं अपरिपक्व राजनीति के पर्याय राहुल गांधी। राष्ट्रीय राजनीतिक दल कांग्रेस (INC) के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी में न तो धैर्य है, न विवेक और न ही परिपक्वता। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि अभी लॉकडाउन 4.0 की अवधि समाप्त होने में 120 घण्टे यानी 5 दिन शेष थे, परंतु राहुल की राजनीतिक अधीरता ने जवाब दे दिया और उन्होंने 27 मई को ट्वीट कर लॉकडाउन की सफलता पर सवाल खड़े कर दिए।

विवेक की बात करें, तो राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री द्वारा 24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा करते समय व्यक्त की गई संभावना को कोरोना का रामबाण उपचार समझ लिया। परिपक्वता के मामले में तो राहुल ने पुराने रिकॉर्ड में नया रिकॉर्ड जोड़ दिया, जब उन्होंने यह ट्वीट करने से पहले न मोदी की कार्यशैली का और न ही लॉकडाउन के लाभालाभ से जुड़े विभिन्न अध्ययनों का अभ्यास किया। राहुल यदि ये दो काम कर लेते, तो न लॉकडाउन पर सवाल उठाते और न ही मोदी सरकार से यह पूछते कि आगे क्या करने वाले हैं ?

‘छोड़ो बेकार की बातों को’…

‘छोड़ो बेकार की बातों को’… लॉकडाउन पर प्रश्नचिह्न लगाने वाले ‘कुछ’ लोगों से न मोदी सरकार के चाल-चरित्र पर प्रभाव पड़ने वाला है और न ही कोरोना वायरस समाप्त होने वाला है। इसीलिए आगे बढ़ते हैं और यह विश्लेषण करने का प्रयास करते हैं कि जून में कैसा होगा जीवन ? लॉकडाउन 4.0 का काउंटडाउन आरंभ हो चुका है।

31 मई, 2020 को मध्य रात्रि 12.00 बजे लॉकडाउन 4.0 की अवधि समाप्त हो जाएगी। इसके साथ ही देश में लॉकडाउन के 68 दिन पूरे हो जाएँगे। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि देश में लॉकडाउन 5.0 आएगा ? लॉकडाउन के बावज़ूद देश में जिस प्रकार कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए इस प्रश्न का उत्तर निश्चित रूप से ‘हाँ’ ही होगा और ‘हाँ’ ही होना चाहिए।

समाप्त होगा NDMA का क्रियान्वयन ?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और गृह मंत्री अमित शाह तथा गृह मंत्रालय (MHA) लॉकडाउन 4.0 के काउंटडाउन के साथ ही 1 जून को लेकर नया प्लान बनाने में जुट चुके हैं। जहाँ तक हमें जानकारी है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा केन्द्र सरकार अब 31 मई को समाप्त हो रहे लॉकडाउन 4.0 के बाद की स्थिति में राज्यों को अधिक अधिकार देने जा रहे हैं।

इसके साथ ही मोदी सरकार देश में गत 25 मार्च से लागू राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम (NDMA) को भी 1 जून से समाप्त करने पर विचार कर रही है, ताकि राज्य सरकारें लॉकडाउन 5.0 को लेकर स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकें। प्रधानमंत्री मोदी लॉकडाउन 5.0 को लेकर अब मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ जिला कलेक्टरों/जिला मजिस्ट्रेटों को भी विश्वास में लेंगे और 1 जून से नए लॉकडाउन की रूपरेखा निर्धारित करने का उत्तरदायित्व सीएम-डीएम के सौंपी जा सकती है।

क्यों और कैसे संजीवनी सिद्ध हुआ लॉकडाउन ?

राहुल गांधी ने तो अध्ययन नहीं किया, परंतु देश की विभिन्न शासनिक व अशासनिक एजेंसियों की अध्ययन रिपोर्ट के आँकड़े बताते हैं कि देश में क्यों लॉकडाउन 5.0 आवश्यक है ? यदि इन आँकड़ों पर विश्वास किया जाए, तो निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि भारत के लिए लॉकडाउन कोरोना विरोधी युद्ध में संजीवनी समान सिद्ध हुआ है।

केन्द्र सरकार के नीति आयोग (NITI AAYOG) ने विभिन्न स्वतंत्र अध्ययनों के आधार पर कहा कि यदि भारत में लॉकडाउन नहीं होता, तो कोरोना संक्रमितों की संख्या 37 लाख से 70 लाख तक पहुँच जाती। यह लॉकडाउन देश के लाखों लोगों के लिए संजीवनी सिद्ध हुआ, क्योंकि यदि लॉकडाउन नहीं होता, तो भारत में कोविड 19 मृतकों का आँकड़ा 50 हज़ार से 2 लाख 10 हज़ार तक पहुँच जाता।

नीति आयोग के सदस्य व सशक्त समूह 1 के अध्यक्ष वी. के. पॉल के अनुसार 25 मार्च को लॉकडाउन लागू हुआ और 3 अप्रैल के बाद कोरोना संक्रमितों के मामलों की गति में तीव्रता से कमी आई। पॉल ने बॉस्टन कन्सल्टिंग ग्रुप मॉडल की अध्ययन रिपोर्ट के हवाले से कहा कि लॉकडाउन के कारण भारत में 1 लाख 20 हज़ार से 2 लाख 10 हज़ार लोगों को कोविड 19 से मरने से बचा लिया गया। यदि लॉकडाउन न होता, तो भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या 36 लाख से 70 हज़ार तक पहुँच जाती।

दो स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों के अध्ययन के अनुसार लॉकडाउन के कारण कोरोना संक्रमितों की संख्या 23 लाख कम हुई और 68 हज़ार जानें बचीं। इसी प्रकार भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य फाडउंडेशन के अध्ययन के अनुसार लॉकडाउन के कारण देश में 78 हज़ार लोगों की जानें बचीं।

क्यों और कहाँ आवश्यक है लॉकडाउन 5.0 ?

विभिन्न अध्ययनों के आँकड़े यह भी संकेत देते हैं कि देश में लॉकडाउन 5.0 की अब कहाँ-कहाँ आवश्यकता है ? केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार लॉकडाउन के कारण ही कोविड 19 महामारी का प्रकोप देश में कुछ स्थानों तक सिमटता जा रहा है।

नीति आयोग के आँकड़ों के अनुसार देश में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या में 70 प्रतिशत केवल महानगरों व नगरों में हैं। कुल कोरोना संक्रमितों में 80 प्रतिशत केवल 5 राज्यों में हैं और इनमें भी 60 प्रतिशत कोरोना संक्रमित मामले केवल 5 महानगरों में हैं।

थोड़े मोटे तौर पर अध्ययन किया जाए, तो देश में कोरोना के कुल मामलों में से 90 प्रतिशत 10 राज्यों में है और इनमें भी 70 प्रतिशत केस केवल 10 महानगरों में है। ऐसे में देश के इन 10 राज्यों और इन 10 महानगरों में ही अब कठोर लॉकडाउन 5.0 की आवश्यकता रह गई है। देश का 60 प्रतिशत से अधिक भूभाग अब लॉकडाउन के नियंत्रणों से मोटे तौर पर बाहर आ सकता है।

ये हैं वो राज्य-जिले-महानगर, जहाँ लॉकडाउन 5.0 निश्चित

आइए, अब आपको यह भी बता देते हैं कि 1 जून से देश के किन राज्यों, जिलों और महानगरों में कठोर लॉकडाउन का पाँचवाँ चरण निश्चित रूप से आने की संभावना है। यद्यपि राज्य से तात्पर्य संपूर्ण राज्य नहीं है और न ही जिले या महानगर का अर्थ संपूर्ण जिला-महानगर है।

उन राज्यों-जिलों-महानगरों में जहाँ कोरोना के सर्वाधिक मामले हैं, जिन्हें कंटेनमेंट ज़ोन, रेड ज़ोन या हॉटस्पॉट की श्रेणी में डाला गया है, वहीं लॉकडाउन 5.0 कठोरतापूर्वक लागू होने की संभावना है।

टॉप 10 कोरोना संक्रमित राज्य-जिले-महानगरों की सूची :

महाराष्ट्र (कुल केस – 54.758)
जिले-महानगर

Mumbai – 34,151
Thane – 9,079
Pune – 7,030
Mumbai Suburban – 3,284
Aurangabad – 1,376
Nashik – 1,082
Raigad – 1,003
Palghar – 730
Solapur – 659
Jalgaon – 521
Akola – 506
Nagpur – 437
Satara – 428
Kolhapur – 358
Ratnagiri – 201
Amravati – 198
Hingoli – 138
Dhule – 119
Nanded – 118
Latur – 109
Yavatmal – 107
Jalna – 98
Sangli – 98
Ahmednagar – 81
Osmanabad – 57
Buldhana – 56
Gondia – 52

तमिलनाडु (कुल केस – 17.728)
जिले-महानगर

Chennai – 11,579
Chengalpattu – 621
Thiruvallur – 562
Cuddalore – 439
Ariyalur – 408
Villupuram – 363
Tirunelveli – 350
Kanchipuram – 281
Kallakurichi – 263
Madurai – 253
Tiruvannamalai – 250
Tuticorin – 181
Coimbatore – 164
Virudhunagar – 141
Dindigul – 134
Thanjavur – 126
Perambalur – 123
Theni – 114
Tiruppur – 113
Salem – 108
Ranipet – 99
Namakkal – 94
Karur – 82
Tenkasi – 82
Tiruchirappalli – 77
Ramanathapuram – 72
Erode – 68
Kanniyakumari – 66
Nagapattinam – 57

गुजरात (कुल केस – 14,829)
जिले-महानगर

Ahmadabad – 12,378
Surat – 1,538
Vadodara – 974
Gandhinagar – 222
Bhavnagar – 125
Mahisagar – 121
Arvalli – 113
Banaskantha – 106
Rajkot – 100
Anand – 98
Mahesana – 94
Sabarkantha – 89
Patan – 83
PanchMahal – 75
Kheda – 70
Kachchh – 60
Botad – 55
Jamnagar – 52

दिल्ली (कुल केस – 14,465)
जिले-महानगर

Central Delhi – 2,999
North West Delhi – 2,647
West Delhi – 2,145
New Delhi – 2,070
North Delhi – 2,023
South East Delhi – 1,255
South West Delhi – 1,213
South Delhi – 1,030
East Delhi – 1,005
North East Delhi – 977
Shahdara – 939

राजस्थान (कुल केस – 7,423)
जिले-महानगर

Jaipur – 1,898
Jodhpur – 1,281
Udaipur – 637
Nagaur – 414
Kota – 411
Ajmer – 331
Dungarpur – 286
Chittorgarh – 215
Jhalawar – 205
Bhilwara – 182
Tonk – 165
Pali – 147
Bharatpur – 128
Rajsamand – 105
Bikaner – 98
Banswara – 97
Jalore – 97
Sirohi – 74
Sikar – 69
Jhunjhunu – 63
Alwar – 53

मध्य प्रदेश (कुल केस – 7,024)
जिले-महानगर

Indore – 3,343
Bhopal – 1,440
Ujjain – 688
Burhanpur – 295
East Nimar – 233
Jabalpur – 231
Gwalior – 132
Khargone – 120
Neemuch – 119
Dhar – 116
Sagar – 112
Mandsaur – 107
Dewas – 95
Morena – 87
Raisen – 68
Bhind – 56

उत्तर प्रदेश (कुल केस – 6,724)
जिले-महानगर

Agra – 897
Gautam Buddha Nagar – 543
Ghaziabad – 465
Meerut – 408
Lucknow – 289
Saharanpur – 259
Kanpur Nagar – 256
Moradabad – 195
Rampur – 179
Varanasi – 174
Firozabad – 172
Jaunpur – 162
Barabanki – 145
Aligarh – 140
Basti – 140
Hapur – 135
Ghazipur – 111
Bulandshahr – 108
Siddharth Nagar – 97
Ayodhya – 96
Amethi – 94
Bijnor – 86
Mathura – 85
Gorakhpur – 79
Sambhal – 74
Sant Kabeer Nagar – 72
Rae Bareli – 71
Sultanpur – 71
Muzaffarnagar – 69
Deoria – 67
Amroha – 65
Azamgarh – 59
Bahraich – 59
Kheri – 59
Ambedkar Nagar – 56

पश्चिम बंगाल (कुल केस – 4,009)
जिले-महानगर

Kolkata – 1,857
Howrah – 961
24 Paraganas North – 537
Hooghly – 257
24 Paraganas South – 145
Maldah – 138
Dinajpur Uttar – 118
Medinipur East – 80
Murshidabad – 78
Birbhum – 68
Purba Bardhaman – 64
Nadia – 50

बिहार (कुल केस – 2,968)
जिले-महानगर

Rohtas – 238
Patna – 215
Munger – 151
Madhubani – 143
Jehanabad – 136
Khagaria – 124
Buxar – 122
Begusarai – 120
Katihar – 110
Bhagalpur – 97
Nalanda – 91
Gopalganj – 90
PurbiChamparan – 87
Samastipur – 79
Banka – 71
Sheikhpura – 69
Vaishali – 68
Darbhanga – 64
Siwan – 62
Nawada – 59
Madhepura – 56
Aurangabad – 55
Gaya – 54
Bhojpur – 54
Kaimur (Bhabua) – 54
Saharsa – 51

आंध्र प्रदेश (कुल केस – 2,719)
जिले-महानगर

Kurnool – 701
Krishna – 469
Guntur – 412
Anantapur – 344
Chittoor – 252
Sri Potti Sriramulu Nell – 68
East Godavari – 167
Y.S.R. – 157
West Godavari – 121
Visakhapatnam – 78
Srikakulam – 67
Prakasam – 64

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