कोरोना पर भारी पड़े 92 वर्षीय ‘बापा’ : कौन है इस सुपर हीरो की शक्ति ?

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सुमन दादा का संदेश, ‘लिव विद कोरोना एंड लव विद कोरोना’

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद (10 मई, 2020)। अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल (एसवीपी) अस्पताल में उस समय हर्ष की लहर दौड़ गई, जब कोरोना संक्रमित एक 92 वर्षीय वृद्ध ने उपचार के बाद इस प्राणघातक रोग पर विजयश्री हासिल कर ली। घातक कोरोना के आगे जहाँ ‘चढ़ती जवानी’ वाले रोगी दम तोड़ रहे हैं, वहीं वृद्धावस्था के कारण रक्तचाप व हृदय रोगों से पीड़ित ये 92 वर्षीय वृद्ध कोरोना को परास्त कर सुपर हीरो बन कर उभरे हैं।

जी हाँ। इन महाशय का नाम है सुमनचंद्र वोरा। अहमदाबाद निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक सुमनचंद्र वोरा की आयु 92 वर्ष है और वे अब अपने लोगों में सुमन दादा के नाम से अधिक विख्यात हैं। वे पिछले 35 वर्षों से रक्तचाप एवं 86 वर्ष की आयु में हृदय रोग के चलते कार्डियाक उपचार व एक बार एंजियोप्लास्ट करा चुके हैं।

घातक रोगों से लड़ कर भी 92 वर्ष की आयु तक पहुँच जाने वाले सुमनचंद्र वोरा ने अब समूचे विश्व में शवों के ढेर लगा देने वाले कोरोना (CORONA) को भी परास्त कर दिया है और कदाचित वे भारत में कोरोना को परास्त करने वाले सर्वाधिक आयु के कोरोना विजेता बने हैं।

कोरोना संक्रमण के बाद अहमदाबाद के SVP अस्पताल में उपचार ले रहे सुमन दादा ने कोरोना पर विजय पाने के बाद देशवासियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जब तक असाध्य कोरोना की कोई सटीक वैक्सीन या दवाई नहीं खोजी जाती, तब तक हमें कोरोना को अपनी जीवन शैली का हिस्सा मानना होगा। उन्होंने कहा कि कोरोना से लड़ने का एक ही उपाय है, ‘लिव विद कोरोना, लव विद कोरोनाइज़्ड’। वे कहते हैं कि कोरोना से डरने की नहीं, लड़ने की आवश्यकता है और लड़ने के लिए आत्म-बल एवं आत्म-विश्वास परम् आवश्यक है।

गोविंद पर श्रद्धा ने दिलाई कोविड पर विजय

कोरोना संक्रमण यानी कोविड 19 (COVID 19) का नाम सुनते ही जहाँ अच्छे-अच्छों के हाथ-पाँव ढीले पड़ जाते हैं, वहीं सुमनचंद्र वोरा ने एसवीपी अस्पताल में अत्यंत धैर्य के साथ इस महामारी से मुक़ाबला किया। सुमनभाई अपनी इस विजय के पीछे निहित शक्ति के विषय में कहते हैं, ‘मुझे श्रीजी बाबा (भगवान श्री कृष्ण) पर अटूट श्रद्धा है। मुझे विश्वास था कि वे मुझे कुछ नहीं होने देंगे। दूसरा विश्वास मेरे परिवार पर था, जो हर स्थिति में मेरे साथ खड़ा रहा, जिससे मुझे मानसिक संबल मिला। साथ ही एसवीपी अस्पताल के चिकित्सकों सहित कर्मचारियों की सेवा-सुश्रुषा ने भी मेरी कोरोना विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।’ सुमनभाई का स्वस्थ होना एक प्रकार से कोविड पर ‘गोविंद’ की ही विजय है, क्योंकि सुमनभाई श्रीमद् भगवद गीता के अध्याय 12 व 15 का नियमित अभ्यास करते हैं। अध्याय 12 भक्तियोग तथा 15 पुरुषोत्तम योग है। स्पष्ट है कि सुमनभाई को कठिन परिस्थितियों में गीता व गोविंद की आध्यात्मिक शक्तियों ने पूरा साथ दिया।

सरकारी सुविधाओं से संतुष्ट है परिवार

सुमनभाई के पुत्र नितिनभाई वोरा ने कहा, ‘पिताजी को 10 अप्रैल को एसवीपी में भर्ती कराया गया था। राज्य सरकार ने एसवीपी अस्पताल में कोविड 19 के रोगियों के लिए उत्तम उपचार, सेवा-सुश्रुषा आदि व्यवस्थाएँ की हैं। साधारण व्यक्ति कोरोना संक्रमण होते ही आधी हिम्मत हार जाता है, परंतु पिताजी ने कोरोना को मन से स्वीकार किया आत्म-विश्वास से विजय पाई। यदि विश्वास बनाए रखा जाए, तो कोरोना को हराना ठिन नहीं है।’ नितिनभाई की पत्नी वत्सला चिकित्सक हैं। उन्हें भी कोरोना हुआ था, परंतु वे भी दृढ़ता के साथ इससे मुक्त होने में सफल रहीं।

वोरा परिवार का एक ही मंत्र, ‘जो डर गया, वो मर गया…’

सुमनचंद्र वोरा का परिवार मुख्यत: चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। कोरोना संक्रमण के बाद पूरे परिवार ने बॉलीवुड फिल्म शोले के एक ही डायलॉग को आत्मसात् कर लिया, ‘जो डर गया, वो मर गया…’। इसीलिए वोरा परिवार विशेषकर सुमन दादा सभी लोगों को एक ही संदेश देते हैं कि कोरोना से डरना नहीं, लड़ना है। साथ ही कोरोना को जीवन शैली का हिस्सा बनाना होगा। सुमन दादा का नया सूत्र है, ‘लिव विद कोरोना एण्ड लव विद कोरोना’ अर्थात् कोरोना के साथ जीना सीखें और कोरोना संक्रमितों से घृणा नहीं, वरन् प्रेम करना सीखें, जिससे उन्हें इस संघर्ष में मानसिक संबल मिले।