उधड़ने वाली है चीन की चमड़ी : क्या अमेरिका सबसे बड़े ‘अपराधी’ को छोड़ देगा ? भारत क्या करेगा ?

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3000 की मौत पर लादेन को मारने वाला अमेरिका

60,000 मौतों के ‘सौदागर’ को छोड़ देगा अमेरिका ?

कई तानाशाहों को मौत के घाट उतारने वाला अमेरिका

‘आर्थिक आक्रमणकारी’ को क्षमा करेगा अमेरिका ?

कई देश चीन को ICJ में घसीटने की तैयारी में

लाशों के ढेर पर विश्व सत्ता बनना चाहता है चीन ?

अति महत्वाकांक्षा बनेगी चीन के विनाश का कारण ?

विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद (28/4/2020)। सुपरपावर अमेरिका और रूस को पछाड़ कर वैश्विक महासत्ता बनने के सपने संजो रहे चीन के लिए आने वाला समय काँटों भरा हो सकता है। भारत सहित पूरा विश्व भले ही इस समय कोरोना वायरस (CORONA) से फैली कोविड 19 (COVID 19) महामारी से निपटने में जुटा हो, परंतु अमेरिका कोरोना विरोधी युद्ध के साथ-साथ चीन के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

अमेरिका ही नहीं, पूरा विश्व सही-ग़लत दावों के साथ बार-बार यही कह रहे हैं कि विश्व को सबसे बड़े मानवीय अस्तित्व व आर्थिक संकट में डालने वाली कोरोना महामारी का जनक चीन है और अमेरिका ने तो अधिकृत रूप से कोरोना वायरस को चीनी वायरस कह कर चीन को चेतावनी दे डाली है।

यद्यिप चीन बार-बार स्पष्टीकरण दे रहा है कि कोरोना वायरस को लेकर उसने न तो कोई लापरवाही बरती, न ही कोई जानकारी दुनिया से छिपाई। यहाँ तक कि विश्व के विभिन्न क्षेत्रों के कई विशेषज्ञ तो अभी तक यह सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं कि कोरोना वायरस चीन से ही निकला है ? कुछ विशेषज्ञों ने तो उल्टे कोरोना की उत्पत्ति अमेरिका में होने तथा अमेरिकी सेना के ज़रिए चीन में पहुँचने का भी दावा किया है।

वैश्विक अपराधी बन चुका है चीन !

चीन की नीयत से सर्वाधिक अच्छे से परिचित भारत है, तो शेष दुनिया भी भली-भाँति जानती है कि चीन अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठ कर कभी विश्व कल्याण के विषय में सोच ही नहीं सकता। ऐसे में यदि कोरोना को लेकर अमेरिका सहित विश्व के कई शक्तिशाली देश चीन पर उंगली उठ रहा रहे हैं, तो शेष विश्व की दृष्टि में भी चीन स्वत: ही अपराधी बन चुका है।

कोरोना के बाद समूचे विश्व में बनी नकारात्मक छवि के चलते चीन के मंसूबों पर पानी फिरता नज़र आ रहा है। एक दावे के अनुसार चीन ने अपनी महत्वाकांक्षी व विस्तारवादी नीति के तहत ही कोरोना पर विश्व से झूठ बोला, जिससे दुनिया की बड़ी-बड़ी अर्थ व्यवस्थाएँ ठप हो जाएँ और चीन का कारोबार चल निकले।

यही हुआ भी। अमेरिका-ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय-पश्चिमी देश जान-माल के नुकसान के साथ ही आर्थिक बदहाली में आ चुके हैं, तो एशिया में भी रूस-भारत सहित कई देश कोरोना संकट के चलते हज़ारों नागरिकों की बलि व ख़रबों के आर्थिक नुकसान को झेल रहे हैं।

लाशों का ढेर लगाने वाले को बख़्शेगा अमेरिका ?

जैसा कि पूरा विश्व यह मान रहा है कि कोरोना वायरस चीन से निकल कर पूरी दुनिया में फैला और उसने पूरी दुनिया में अब तक 2 लाख से अधिक लोगों को मौत की नींद सुला दिया है और इसका सबसे बड़ा शिकार हुआ है सुपरपावर अमेरिका, जहाँ अब तक 56,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

इन परिस्थितियों में प्रश्न यह उठता है कि क्या अमेरिका लाशों के ढेर लगा देने के लिए उत्तरदायी किसी भी देश को यूँ ही छोड़ देगा ? उत्तर है, नहीं। अमेरिका का इतिहास रहा है कि उसने अपने हर अपराधी को ढूँढ-ढूँढ कर मारा है, उसका अंत किया है। अमेरिका ने 9/11 के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर आतंकवादी आक्रमण में केवल 3000 लोगों की जान लेने वाले कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के एबटाबाद से ढूँढ निकाला था और उसे मृत्युदंड दिया था।

अमेरिका उसे नुकसान पहुँचाने वाले सद्दाम हुसैन सहित कई तानाशाहों का अंत कर चुका है। ऐसे में 56,000 से अधिक नागरिकों की मौत की नींद सुला देने वाले कोरोना संक्रमण के उत्तरदायी, जिसे वह चीन को मानता है, को अमेरिका किसी कीमत पर नहीं छोड़ेगा।

चीन को देना होगा दुनिया की अदालत में जवाब

कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर एक तरफ जहाँ अमेरिका आगबबूला है, वहीं दुनिया के कई अन्य देश भी चीन को इसके लिए उत्तरदायी ठहराते हुए उसे अंतरराष्ट्रीय न्यायिक न्यायालय (INTERNATION COURT OF JUSTICE) अर्थात् ICJ में घसीटने की तैयारी में हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को ही घोषणा की कि कोरोना वायरस संक्रमण की पड़ताल तथा उससे हुए नुकसान की भरपाई के लिए वे आईसीजे में चीन के विरुद्ध मुकदमा करेंगे। जर्मनी भी चीन से आर्थिक मुआवज़ा मांग चुका है तथा विश्व के कई अन्य देश भी चीन के विरुद्ध लामबंद हो रहे हैं।

इन सभी वैश्विक गतिविधियों से स्पष्ट है कि चीन को कोरोना संकट के समाप्त होने के तुरंत बाद अमेरिका सहित कई देशों को ही नहीं, अपितु आईसीजे को भी जवाब देना होगा।

वैसे शक्तिशाली देशों के लिए आईसीजे बहुत अहमियत नहीं रखता, परंतु यदि आईसीजे चीन के विरुद्ध फ़ैसला, अभिप्राय या टिप्पणी मात्र भी कर देता है, तो चीन की वैश्विक प्रतिष्ठा को भारी धक्का पहुँचना निश्चित है और इससे उसे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

अमेरिका ने पहल की, तो तीसरा विश्व युद्ध निश्चित

कोरोना को लेकर अमेरिका सहित पूरे विश्व से आ रहे दबाव के पश्चात् भी चीन झुकने को तैयार नहीं है। वैसे चीन एक शक्तिशाली देश है। उसकी आर्थिक व सामरिक शक्ति अमेरिका, रूस सहित कई पश्चिमी देशों से टक्कर लेने में सक्षम है। साथ ही चीन परमाणु शस्त्र सम्पन्न देश भी है।

फिर भी कोरोना ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को बुरी तरह छेड़ दिया है और कोरोना से एक बार निपटते ही अमेरिका चीन के विरुद्ध कार्रवाई शुरू करने को पूरी तरह तैयार है। अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को चीन का हिमायती बताते हुए उसकी फंडिंग पहले ही रोक दी है और अब ट्रम्प के आक्रोश का अगला लक्ष्य चीन ही होगा।

अमेरिका ने चीन के विरुद्ध जब तक आर्थिक प्रतिबंध, आईसीजे में मुकदमे जैसे कदम उठाए, तब तक तो ठीक है, परंतु यदि यह बात अस्त्र-शस्त्रों तक पहुँची, तो 75 वर्ष बाद तीसरा विश्व युद्ध निश्चित व अवश्यंभावी हो जाएगा, क्योंकि चीन का इतिहास कभी किसी के आगे नहीं झुकने का रहा है, तो अमेरिका का भी स्वयं को सुपरपावर बनाए रखने में बाधा बनने वाले हर उठने वाले फन को कुचलने का इतिहास रहा है।

चीन के वर्तमान राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी वैश्विक आरोपों के पश्चात् भी कहीं भी दबाव में नहीं दिखाई दे रहे।

भविष्य में क्या होगी भारत की भूमिका ?

आप सबके मन में प्रश्न यह उठ रहा होगा कि यदि कोरोना को लेकर विश्व दो भागों में बँट जाएगा, तो भारत का रुख क्या होगा ? क्या भारत अमेरिकी नेतृत्व वाले चीन विरोधी हिस्से का समर्थन करेगा ? वैसे सामरिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो निश्चित रूप से भारत को कोरोना मामले में चीन विरोधी लड़ाई में अमेरिकी धड़े का ही साथ देना चाहिए।

इससे भारत को दो फायदे होंगे। पहला यह कि चीन प्राय: सीमा विवाद व घुसपैठ कर भारत विरोधी एजेंडा को समय-समय पर हवा देता रहता है। शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अहमदाबाद में साबरमती रिवरफ्रंट पर झूला झूला था, परंतु बाद में डोकलाम में घुसपैठ की थी।

चीन कई बार मोदी सहित भारतीय नेताओं के अरुणाचल प्रदेश दौरे पर भी आपत्ति उठाता रहता है। चीन पर अमेरिका वार होगा, तो भारत को स्वत: राहत मिलेगी। दूसरा, चीन भारत के सबसे कट्टर शत्रु पाकिस्तान का भी निरंतर साथ देकर भारत के लिए मुसीबतें खड़ा करता रहा है।

कोरोना संकट काल में भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के सबसे बड़े मददग़ार जिनपिंग ही बने हुए हैं। चीन भारत की संप्रभुता को चुनौती देते हुए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर का निर्माण कर रहा है, जिसका भारत यह कह कर विरोध करता रहा है कि पीओके भारत का हिस्सा है, परंतु चीन भारत के विरोध की लगातार अवहेलना कर रहा है।

भारत को अमेरिका-चीन के संघर्ष में आर्थिक रूप से भी फायदा हो सकता है। वैसे भी कोरोना की बदनामी के बाद चीन से हज़ारों विदेशी कंपनियाँ पलायन कर चुकी हैं या कर रही हैं और इनमें सैंकड़ों कंपनियों ने भारत का रुख किया है।