CORONA : भारत ही दिलाएगा दुनिया को इस कँटीले ‘मुकुट’ से मुक्ति और मोदी बनेंगे ‘शूलपाणि’ ?

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आलेख : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद। अभी 109 दिन पूर्व ही 19 (वर्ष 2019) को स्मतिपूर्ण विदाई देने वाले विश्व ने 20 (वर्ष 2020) का उमंग, उत्साह व उल्लास से स्वागत किया। भारत सहित पूरे विश्व में अभी 20 के लिए नई योजनाओं, नए आयोजनों, नए संकल्पों तथा नई चुनौतियों के प्रतिकार की तैयारी भी नहीं हुई थी कि 19 का यह आँकड़ा एक नए व भयावह रूप के साथ सामने आ गया।

जी हाँ ! हम बात कर रहे हैं COVID 19 की, जिसने चीन के वुहान से सुरसा की तरह मुँह खोला और भारत सहित विश्व के अविकसित से लेकर विकासशील ही नहीं, अपितु विकसित देशों के लोगों को अपना ग्रास बनाना प्रारंभ कर दिया। इसमें 19 इसलिए जुड़ा हुआ है, क्योंकि इसने दिसम्बर-2019 में ही चीन के वुहान में दस्तक दे दी थी। CORONA VIRUS DISEASE 19 अर्थात् कोविड 19 को NOVEL VIRUS कहा जाता है। नोवेल का अर्थ उपन्यास होता है। साहित्य जगत में उपन्यास केवल पुस्तक, वृत्तांत, कथा-कहानी से संदर्भित है, परंतु उपन्यास का शाब्दिक अर्थ होता है, किसी वस्तु के अनेक भाग होना। कोरोना कोविड 19 नामक वायरस के साथ भी नोवेल इसलिए जोड़ा गया, क्योंकि यह वायरस अनेक उप-न्यासों के साथ लोगों को संक्रमित करता है।

ऐसा मुकुट, जिसे कोई धारण नहीं करना चाहेगा !

तो भारत सहित पूरा विश्व जिस 2019 को 109 दिन पूर्व विदा कर चुका था, वह 2019 कोरोना कोविड 19 के नाम से हाहाकार मचा रहा है। इस नोवेल वायरस के कोरोना नामकरण के पीछे भी रोचक तथ्य है। साधारणत: मुकुट प्राचीनकाल में राजाओं व उनके दरबारियों के सिर की शोभा बढ़ाते थे। यद्यपि मुकुट का युग चला गया, परंतु उसकी गरिमा इतनी उच्च है कि आज के आधुनिक युग में भी किसी नेतृत्वकर्ता के लिए मुकुट शब्द का प्रयोग किया जाता है। मुकुट न सही, परंतु अपने लिए मुकुट शब्द प्रयोग की चाहत रखने वालों की आज भी कोई कमी नहीं है, परंतु वर्तमान संक्रमण काल में यह मुकुट घातक महामारी कोरोना वायरस का पर्याय बन चुका है। करोड़ों लोगों के सिर पर काल की तरह सवार नोवेल वायरस को जो कोरोना नाम दिया गया है, वह कोरोना शब्द लातीनी भाषा का है, जिसका अर्थ होता है मुकुट (CROWN)। इस वायरस के इर्द-गिर्द काँटों जैसा ढाँचा होने के कारण इसका आकार मुकुट जैसा दिखाई देता है। सूर्य ग्रहण के समय चंद्र जब सूर्य को ढँक लेता है, तब चंद्र के चारों ओर किरणें प्रतीत होती हैं। उसे भी कोरोना ही कहते हैं। इस व्याख्या से देखा जाए, तो इस समय कोरोना के कहर का ग्रहण पूरे विश्व पर कालिमा बन कर छाया हुआ है।

विराट विश्व हुआ वामन, महान भारत बना शामक

चीन के वुहान से उत्पन्नकोरोना कोविड 19 ने इतनी तीव्र गति से अपना संक्रमण जाल फैलाया कि विराट विश्व वामन हो गया, परंतु महान भारत ने इस अनियंत्रित कोरोना की ऐसी लगाम कसी कि आज पूरी दुनिया में कोरोना के सर्वश्रेष्ठ शामक के रूप में भारत का नाम लिया जा रहा है। विश्व की महासत्ता कहलाने वाले अमेरिका सहित सभी विकसित देश जहाँ कोरोना से लड़ते हुए थकान व पराजय की निराशा में डूबे हुए हैं, वहीं महान भारत कोरना विरोधी युद्ध में विकसित देशों से लेकर विकासशील व निर्धन-अविकसित देशों तक में आशा की नई किरण जगा रहा है। पूरे विश्व में कोरोना संक्रमितों की संख्या 20 लाख व मृतकों की संख्या 13 लाख तक पहुँच चुकी है, जिनमें 7 लाख संक्रमित व 25 हज़ार मौतों के साथ विश्व का सबसे विकसित व शक्तिशाली देश अमेरिका शीर्ष पर है, तो भारत विश्व के दूसरे शक्तिशाली देश रूस, महासत्ता बनने के सपने देखने वाले चीन, विकसित व शक्तिशाली देशों की श्रेणी में आने वाले फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, ब्राज़ील, जापान, ऑस्ट्रेलिया, इज़राइल के बाद ठेठ 24वें स्थान पर है। चीन के बाद सबसे 1.35 करोड़ लोगों की दूसरी सबसे अधिक व घनी जनसंख्या, अनेक धर्मावलंबियों, अनेक राज्यों, भाषाओं सहित करोड़ों प्रकार की विविधताओं व जटिलताओं के पश्चात् भी भारत में कोरोना संक्रमितों का आँकड़ा 15,000 तथा मृतकों का आँकड़ा 500 के नीचे है। यही विराट विश्व के समक्ष महान भारत का सबसे बड़ा उदाहरण है। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि भारत ने अनेक समस्याओं से जूझते हुए भी कोरोना को कसके बांधने में पूरी शक्ति झोंक दी है। इतना ही नहीं, भारत कोरोना का शमन करने वाले में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त करने वाले देशों में शीर्ष पर है।

कुशल व दूरदृष्टा मोदी के समक्ष विश्व नतमस्तक

किसी भी युद्ध में जय का यश व पराजय का अपयश युद्ध के नेतृत्वकर्ता को मिलता है। इस सनातन सत्य वाक्य को यदि कोरोना विरोधी युद्ध के साथ जोड़ कर देखा जाए, तो नि:संदेह इस युद्ध में एक-एक डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्य कर्मचारी, सफाई कर्मचारी, सरकारी व पुलिस अधिकारी तथा कर्मचारी एक योद्धा के रूप में रणभूमि में डटे हुए हैं और उन्हीं के कारण भारत कोरोना विरोधी अभियान में विश्व पथ प्रदर्शक बन कर उभरा है, तो इन योद्धाओं का नेतृत्व कर रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कुशलता, रणनीति, दूरदृष्टि एवं विज्ञानयुक्त आध्यात्मिक ज्ञान के उपयोग की पद्धति ने भी पूरे विश्व को चकित् व नतमस्तक कर दिया है। चुनावी नारा ‘मोदी है, तो मुमकिन है’ कोरोना विरोधी युद्ध में पूरे विश्व को सांत्वना दे रहा है कि भारत व मोदी की रणनीति पर चल कर वे भी इस महासमर में विजय प्राप्त करेंगे। एक प्रकार से पूरी दुनिया इस संक्रमण काल में ‘भारतेन्द्र’ मोदी की ओर आशापूर्ण दृष्टि से देख रही है। ‘वसुधैव कुटुम्कम्’ की अवधारणा को आत्मसात् करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना विरोधी लड़ाई में अमेरिका, इज़राइल, जापान सहित कई देशों की सहायता कर यह सिद्ध भी कर दिखाया कि वे वास्तव में पूरे विश्व को अपना परिवार मानते हैं। उनकी विचारधारा सीमाओं से सीमित वामन नहीं, अपितु विराट है, जो विश्व के प्रत्येक नागरिक का कल्याण चाहती है। एक प्रकार से कोराना के इस संक्रमण काल में भारत विश्व का पथ प्रदर्शक देश और नरेन्द्र मोदी महानायक बन कर उभर रहे हैं। कोरोना का यह संक्रमण काल भावी विश्व में अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, जापान, जर्मनी, फ्रांस जैसे देशों के वर्चस्व को निरस्त कर भारत को ‘विश्व गुरु’ व नरेन्द्र मोदी को ‘विश्व नायक’ का महान पद एवं गरिमा प्रदान करके ही समाप्त होगा तथा नरेन्द्र मोदी शूलपाणि (शूल को धारण करने वाला) बन कर इस शूली मुकुट से पूरी दुनिया को मुक्ति दिलाएँगे। मोदी ही इस शूली मुकुट को फूलों के त्रिपुट में परिवर्तित करेंगे।

क्यों विश्व महासत्ता बनने की ओर है अग्रसर भारत ?

अर्थ, धन, बल व आधुनिक विज्ञान के सहारे जो अमेरिका (USA) पूरी दुनिया को धमकाता था, उसके राष्ट्रपति डोलाल्ड ट्रम्प को कोरोना संकट के दौरान भारत व मोदी से दवाइयों के लिए गिड़गिड़ाना पड़ा। अमेरिका में सर्वाधिक संक्रमण व मृत्यु ने यह सिद्ध कर दिया कि अमेरिका विश्व का सर्वशक्तिमान व सर्वश्रेष्ठ देश नहीं है। सोवियेत संघ (USR) के विघटन के बाद स्वयं को पुन: अमेरिका के समकक्ष शक्तिशाली बनाने में जुटे रूस (RUSSIA) ने भी कोरोना को लेकर आरंभ में अमेरिका की तरह ही लापरवाही बरती और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन स्वयं के 2036 तक राष्ट्रपति बने रहने के कार्य में व्यस्त रहे। चीन दक्षिण एशिया में भारत को रोक कर विश्व में अमेरिका व रूस से आगे निकल कर महासत्ता बनना चाहता है, परंतु कोरोना का उत्पत्ति स्थान बनने के बाद उसका सपना चकनाचूर हो गया है। इतना ही नहीं, चीन पर जिस प्रकार कोरोना संक्रमण की जानकारी पूरे विश्व से छिपाने और उसके चलते पूरे विश्व को विनाशकारी संकट में डालने के आरोप लग रहे हैं, उसे देखते हुए यह आशा करना व्यर्थ हो जाता है कि चीन भारत समान ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना के साथ विश्व कल्याण के विषय में सोच सकता है। नास्तिकों का देश व चालाकियों तथा दगाबाज़ियों का इतिहास रखने वाला चीन कभी भी अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठ कर नहीं सोच सकता। इन सब परिस्थितियों में भारत के लोगों की सहस्त्रों वर्ष पुरानी यानी पुन: विश्व महासत्ता बनने की आकांक्षा के साकार होने की आशा का जागी है और यह आशा स्वाभाविक भी है, क्योंकि भारत का नेतृत्व प्राचीन से लेकर आधुनिक भारत की ‘आत्मा’ से संबंध रखने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों में है।