यह भी कर सकता है कोरोना : तो क्या टल जाएँगे गुजरात और बिहार में होने वाले चुनाव ?

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* बिहार में वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल नवंबर में होगा समाप्त

* गुजरात में अहमदाबाद मनपा सहित 317 निकाय-पंचायतों के होने हैं चुनाव

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद। कोरोना (CORONA) महामारी ने समूचे देश में एक अलग व विकट स्थिति उत्पन्न कर दी है। महाविकराल कोरोना संकट से ठीक पहले जहाँ पूरे देश में नागरिक संशोधन अधिनियम (CAA) सहित कई मुद्दों पर राजनीतिक घमासान मचा हुआ था, वहीं पिछले एक महीने से देश में राजनीतिक गतिविधियों और वक्तव्यों का सिलसिला लगभग थम-सा गया है। जहाँ तक चुनावों की बात है, तो देश के लिए यह एक सुखद स्थिति है कि कोविड 19 (COVID 19) से बहुत पहले ही लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव लोकसभा चुनाव 2019 सम्पन्न हो गया, तो उसके बाद भी कई राज्यों में चुनाव हुए। इतना ही नहीं, एक और राहत की बात यह है कि कोरोना संकट के गहराने के बाद भी निकट भविष्य में देश में किसी राज्य में विधानसभा चुनावों का समय नहीं आ रहा है।

यद्यपि भारत ही नहीं, समूचा विश्व यही कामना कर रहा है कि कोरोना संकट का शीघ्रातिशीघ्र समाधान मिल जाएगा। दिसम्बर-2019 से फैले कोरोना वायरस के कहर को चार महीने हो चुके हैं तथा अब तक इसका कोई उपचार खोजा नहीं जा सका है। साथ ही पूरे विश्व में कोरोना तीव्रता से फैलता जा रहा है। ऐसे में हमें पिछले 4 महीनों में कोरोना से निपटने में मिली विफलता की अवगणना करते हुए यही आशा है कि अगले 4-6 महीनों में कोरोना संक्रमण से भारत सहित पूरे विश्व को मुक्ति मिल जाएगी, परंतु यदि ऐसा नहीं हुआ, तो देश के राजनीतिक व चुनावी कार्यक्रमों पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में भले ही पाँच वर्षों में चुनाव होते हैं, परंतु हमारे देश में ग्राम से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक की शासन प्रणाली ऐसी है कि आएदिन देश के किसी न किसी कोने में चुनाव होते ही रहते हैं। कहीं ग्राम पंचायत, तहसील पंचायत, नगर पंचायत व जिला पंचायत चुनाव, तो कहीं नगर पालिका व महानगर पालिका चुनाव होते हैं। हालाँकि पंचायत व निकाय चुनाव अत्यंत छोटे स्तर पर होते हैं, परंतु इनका भी अपना महत्व होता है। इससे ऊपर राज्यों में विधानसभा चुनाव और सबसे ऊपर लोकसभा चुनाव होते हैं। वैसे लोकसभा चुनाव तथा कई राज्यों के विधानसभा चुनाव 2019 में ही सम्पन्न हो गए तथा 2020 में एकमात्र दिल्ली विधानसभा चुनाव हुए, जब कोरोना का संकट विकराल नहीं हुआ था।

कोरोना की लक्ष्मण रेखा लंबी हुई, तो कैसे होंगे बिहार चुनाव ?

कोरोना संकट के कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्र तथा राज्य सरकारों की ओर से खींची गई LOCKDOWN की लक्ष्मण रेखा अभी 3 मई तक बढ़ चुकी है, परंतु यदि कोरोना क़ाबू में नहीं आया तथा इस लक्ष्मण रेखा को और अधिक लंबा खींचना पड़ा, तो देश में इस वर्ष होने वाले एकमात्र बिहार विधानसभा चुनाव 2020 प्रभावित हो सकते हैं। नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। बिहार के अतिरिक्त देश के अन्य किसी राज्य में 2020 में चुनाव नहीं हैं। ऐसे में भगवान न करे, यदि कोविड 19 का जाल नवंबर तक इसी प्रकार फैला रहा, तो संभव है कि बिहार में विधानसभा चुनाव टालने पड़ जाएँ। वैसे फ्रांस जैसे विश्व के कई देशों ने कोरोना के कारण चुनाव प्रक्रिया बाधित नहीं होने दी है, परंतु क्या घनी जनसंख्या वाले भारत में विशेषकर बिहार में SOCIAL DISTANCE यानी सामाजिक अंतर बनाए रखते हुए चुनाव करा पाना संभव होगा, जहाँ मतदान के लिए मतदान केन्द्रों पर भारी संख्या में मतदाताओं की भीड़ उमड़ती है ?

क्या अहमदाबाद सहित 6 महानगर पालिकाओं के चुनाव भी टलेंगे ?

गुजरात में भी अक्टूबर-नवंबर, 2020 का समय स्थानीय निकाय एवं पंचायत चुनावों का रहेगा। गुजरात में कुल 8 महानगर पालिकाएँ हैं, जिनमें से 6 का कार्यकाल अक्टूबर-नवंबर में पूरा होना है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं राज्य की सबसे बड़ी अहमदाबाद महानगर पालिका (AMC) के चुनाव। अहमदाबाद के साथ ही सूरत (SMC), राजकोट (RMC), वडोदरा (VMC), भावनगर (BMC) एवं जामनगर महानगर पालिका (JMC) के चुनाव भी होने हैं। इसी प्रकार लगभग 56 नगर पालिकाओं के चुनाव होने हैं। बात पंचायतों की करें, तो राज्य की 31 जिला एवं 230 तहसील पंचायतों के चुनाव भी इसी कालखंड में होने हैं। अब यदि कोरोना संकट लंबा खिंचा, तो गुजरात में भी स्थानीय निकाय तथा पंचायत चुनाव प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हो जाएगी।

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