CORONA ‘POSITIVE’ : गुजरात के इस समुद्री टापू पर पहली बार रूपाणी सरकार ने पहुँचाया राशन का अनाज…!

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शियाळ बेट में पहली बार खुलेगी राशन की दुकान, रूपाणी सरकार ने दी स्वीकृति

आनंदीबेन पटेल सरकार ने 2015 में पहली बार शियाळ बेट में पहुँचाई थी बिजली

1864 तक लुटेरों का गढ़ रहे टापू पर 1739 में शियाळ कोळियों का वर्चस्व बढ़ा

गांधीनगर। भव्य भारत न्यूज़ (BBN) वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के मध्य भी राष्ट्र एवं समाज में सकारात्मक समाचारों व जानकारियों का प्रचार-प्रसार करने का अभियान चला रहा है। इसीलिए बीबीएन ने अपनी एक कैटेगरी का नाम ही CORONA ‘POSITIVE’ रखा है, जिससे यह तात्पर्य है कि इस आपत्ति को भारत किस तरह सकारात्मकता व अवसर में पलट रहा है। ऐसी ही एक सकारात्मक घटना आज गुजरात में उस समय सामने आई, जब मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की सरकार ने चारों ओर से अथाह अरब सागर से घिरे एक टापू पर राशन की दुकान खोलने के निर्णय की घोषणा की। रूपाणी सरकार का यह निर्णय न केवल गुजरात के दृष्टिकोण से, अपितु भारत के दृष्टिकोण से भी ऐतिहासिक है, क्योंकि सौराष्ट्र अंचल में अमरेली जिले की जाफराबाद तहसील के अंतर्गत पड़ने वाले इस समुद्री टापू पर स्वतंत्रता के 73 वर्ष बाद भी राशन की दुकान नहीं थी, परंतु राष्ट्र पर आए COVID 19 (कोविड 19) संकट ने रूपाणी सरकार के हाथों एक अच्छा कार्य करवा दिया।

जी हाँ ! हम बात कर रहे हैं शियाळ बेट की। शियाळ बेट गुजराती भाषा का शब्द है। शियाळ यानी कोली (कोळी) समाज के वे लोग, जो अमरेली जिले की जाफराबाद तहसील में रहते हैं तथा बेट यानी टापू। इस प्रकार शियाळ कोळी बहुल होने के कारण इसे शियाळ बेट कहा जाता है और गुजरात सरकार ने कोरोना संकट के बीच आज महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 6000 से अधिक लोगों की जनसंख्या वाळे शियाळ बेट में अगले महीने से राशन की दुकान शुरू करने का निर्णय किया है। शियाळ बेट के लोगों की दशकों से यह मांग थी, परंतु तहसील मुख्यालय जाफराबाद से केवल समुद्री मार्ग से जुड़ा होने के कारण शियाळ बेट में जहाँ बिजली पहुँचाने का कार्य वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने किया था, परंतु राशन की दुकान का मामला तब भी अधर में ही रह गया था। अब रूपाणी सरकार ने शियाळ बेट में राशन की दुकान खोलने का निर्णय किया है, जिससे वहाँ के लोगों को राशन का अनाज लेने के लिए 25 समुद्री मील की यात्रा कर जाफराबाद तक नहीं आना पड़ेगा।

शियाळ बेट में दौड़ी प्रसन्नता की लहर

वास्तव में गुजरात सरकार कोरोना संक्रमण एवं लॉकडाउन (LOCKDOWN) के बीच राज्य भर में राशन कार्ड धारकों को अनाज वितरण कर रही है। जहाँ तक शियाळ बेट का प्रश्न है, तो वहाँ के लोगों की रोज़ी-रोटी का मुख्य आधार मछली पालन है। यहाँ खेती-बाड़ी के योग्य ज़मीन नहीं है, क्योंकि चहुँओर समुद्र होने के कारण क्षारयुक्त ज़मीन है। यद्यपि यहाँ के कुओं व बावड़ियों (वाव) में मीठा पानी होता है। लॉकडाउन के बाद शियाळ बेट के लोग नि:सहाय हो गए थे, क्योंकि समुद्र में मत्स्याखेट के लिए जा नहीं सकते थे। ऐसे में रूपाणी सरकार ने 21 अप्रैल, 2020 मंगलवार को शियाळ बेट में 748 राशन कार्ड धारकों को न केवल 20,500 किलो अनाज पहुँचाया, अपितु वहाँ अगले महीने से राशन की दुकान खोलने का ऐतिहासिक निर्णय भी किया। अमरेली जिला प्रशासन ने जाफराबाद से पीपावाव पोर्ट तथा वहाँ से ट्रैक्टर के ज़रिए गेहूँ, चावल, चीनी, दाल सहित आवश्यक वस्तुएँ शियाळ बेट पहुँचाई तथा वहाँ के लोगों को ये सामग्री वितरित की। इस अवसर पर शियाळ बेट की सरपंच भानूबेन शियाळ तथा हमीरभाई शियाळ ने कहा कि इतिहास में पहली बार बेट (टापू) पर इस प्रकार अनाज वितरण का कार्य हो रहा है। टापू जैसे क्षेत्र में अनाज वितरण का कार्य अत्यंत कठिन था। वितरण कार्य में स्थानीय लोगों ने भी सहयोग किया। राज्य सरकार ने विशेष मामले के रूप में तत्काल प्रभाव से शियाळ बेट में अगले महीने से राशन की दुकान कार्यरत् करने का निर्णय भी किया।

क्या है शियाळ बेट का इतिहास ?

नयनरम्य प्राकृतिक स्थानों, प्राचीन व धार्मिक स्थलों के लिए विख्यात शियाळ बेट में थानवाव, चेलैयानो खांडणियो, भेंसलापीर, सवाई पीर, रामजी मंदिर, दरगाह सहित अनेक धार्मिक स्थान हैं। 98 हेक्टेयर में फैले टापू पर अधिकांश लोग मछुआरे हैं। वर्षा ऋतु के दौरान मछुआरों का व्यवसाय ठप हो जाता है। शेष महीनों में मत्स्याखेट ही मुख्य व्यवसाय होता है। वर्ष 1864 तक इस टापू पर रहने वाले लोग लूट प्रवृत्ति के थे और आसपास के गुज़रने वाले जहाजों को लूट लेते थे। तब से यह टापू गुजरात से अलग-थलग पड़ गया था। 1739 में इस टापू पर जाफराबाद के शियाळ कोळी समाज के लोगों का प्रभुत्व बढ़ा, जिसके बाद इसे शियाळ बेट कहा जाने लगा। यहाँ हिन्दू मंदिरों के महत्वपूर्ण भग्नावशेष हैं, तो गोरखनाथ की गुफा भी है। शियाळ बेट में साक्षरता की दर भले ही 40 प्रतिशत के आसपास है, परंतु यहाँ 1000 पुरुषों में 925 से अधिक महिलाओं का अनुपात अनुकरणीय है। शियाळ बेट को नर्मदा जल पहुँचाने के लिए समुद्र के अंदर 4.5 किलोमीटर की पाइप लाइन बिछाई गई है, तो यहाँ अब बिजली भी उपलब्ध है। कमी थी राशन की दुकान की, सो रूपाणी सरकार ने पूरी कर दी है।

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