OH GOD : देश में CORONA से किसी POLITICAL LEADER की पहली मौत, कांग्रेस में शोक की लहर

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PM मोदी ने सत्य ही कहा था, ‘कोरोना संक्रमण में नहीं करता कोई भेद-भाव’

गुजरात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बदरुद्दीन शेख ने SVP में दम तोड़ा

अहमदाबाद मनपा के 20 वर्ष पार्षद, समितियों के अध्यक्ष पदों पर रहे

महानगर-राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कई उत्तरदायित्व निभाए

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहममदाबाद (27/04/2020)। देश में केरल के रास्ते प्रविष्ट हुए कोरोना वायरस (CORONA VIRUS) अब तक 872 लोगों के प्राणों की आहूति ले चुका है। कोविड 19 (COVID 19) महामारी ने सर्वाधिक विनाश महाराष्ट्र में किया है, तो दूसरे स्थान पर गुजरात है, जहाँ 152 लोगों का जीवन कोरोना की भेंट चढ़ चुका है। गुजरात में भी सबसे बुरी दशा आर्थिक राजधानी अहमदाबाद की है, जहाँ कोरोना मृतकों की संख्या 105 पर पहुँच गई है, परंतु इन आँकड़ों के बीच एक चौंकानेवाला, दुर्भाग्यपूर्ण व दु:खद समाचार यह आया है कि कोरोना ने पहली बार किसी राजनीतिक दल के नेता को अपना ग्रास बना लिया है।

जी हाँ ! हम बात कर रहे हैं वरिष्ठ कांग्रेस नेता बदरुद्दीन शेख की, जिन्होंने अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अस्पताल (SVP HOSPITAL) में रविवार देर रात अंतिम साँस ली। अहमदाबाद महानगर पालिका (AHMEDABAD MUNICIPAL COROPORATION) अर्थात् AMC में विपक्ष के पूर्व नेता बदरुद्दीन शेख पिछले 10 दिनों से वेंटिलेटर पर थे। 6 बार डाइलिसिस करने के बावज़ूद शेख रिकवरी नहीं कर पा रहे थे, जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पररखा गया था, परंतु अंतत: रविवार देर रात कोरोना वायरस के कारण उनका निधन हो गया। देश में कोरोना से किसी पॉलिटिकल लीडर की यह पहली मौत है। जैसा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM NARENDRA MODI) ने 24 मार्च को कोरोना के विरुद्ध युद्ध लड़ने के लिए लॉकडाउन (LOCKDOWN) की घोषणा करते समय कहा था कि कोरोना संक्रमण के मामले में कोई भेदभाव नहीं करता। वैसा ही हुआ है। कोरोना ने देश के बड़े-बड़े अमीरों से लेकर ग़रीबों को ही नहीं, वरन् राजनेताओं को भी संक्रमित करने में कोई भेदभाव नहीं बरता और परिणाम हमारे सामने है कि बदरुद्दीन शेख जैसे श्रेष्ठ लोकसेवक को कोरोना के सामने दम तोड़ देना पड़ा। शेख के निधन से कांग्रेस में शोक की लहर दौड़ गई है।

कौन और कितने महान नेता थे बदरुद्दीन शेख ?

राष्ट्रीय राजनीति में भले ही बदरुद्दीन शेख कोई बड़ा नाम न हों, परंतु गुजरात में वे एक लोकप्रिय लोकसेवक, मुस्लिम समुदाय के वरिष्ठ नुमाइंदे, अहमदाबाद और गुजरात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। राजनीतिक रूप से भले ही बदरुद्दीन शेख कांग्रेस के साथ जुड़े हुए थे, परंतु अहमदाबाद जैसे साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील महानगर में उन्होंने साम्प्रदायिक सौहार्द के क्षेत्र में बहुत योगदान दिया था। 13 सितंबर, 1952 को अहमदाबाद में जन्मे बदरुद्दीन शेख ने महानगर के शाहआलम स्थित भक्त वल्लभ धोळा विद्या विहार में स्कूली शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने अहमदाबाद में ही आश्रम रोड स्थित एच. के. आर्ट्स कॉलेज से स्नातक तथा उसके बाद एल. ए. शाह लॉ कॉलेज से अनुस्नातक किया था। बदरुद्दीन शेख ने छात्रकाल से ही कांग्रेस की छात्र शाखा NSUI से राजनीति में प्रवेश किया था।

साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल थे बदरुद्दीन शेख

बदरुद्दीन शेख ने अपनी नेतृत्व क्षमता तथा अल्पसंख्यक समुदाय में अपनी लोकप्रियता के चलते बहुत ज़ल्द ही कांग्रेस नेताओं का दिल जीत लिया और 1985 में उन्हें गुजरात प्रदेश युवा कांग्रेस (GPYC) का महासचिव नियुक्त किया गया। वे पाँच वर्ष तक इस पद पर रहे। गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति (GPCC) ने पहली बार बदरुद्दीन शेख को अहमदाबाद महानगर पालिका चुनाव 1995 में बेहरामपुरा वॉर्ड (BEHRAMPURA WARD) से प्रत्याशी बनाया और वे विजयी होकर पहली बार पार्षद चुने गए। इसके बाद शेख ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। बदरुद्दीन शेख ने 2000 और 2010 के चुनाव में भी जीत हासिल की। अहमदाबाद महानगर पालिका के नगरसेवक के रूप में उन्होंने 15 वर्ष सेवाएँ दीं। बदरुद्दीन शेख ने अहमदाबाद महानगर पालिका में विपक्ष के नेता के रूप में 2010-20 यानी 10 वर्षों तक सेवा दी। वर्ष 2000 में जब अहमदाबाद मनपा में कांग्रेस सत्ता में आई, तो उन्हें मनपा की स्थायी समिति का अध्यक्ष बनाया गया। शेख ने अहमदाबाद मनपा की नगर नियोजन समिति, विधि समिति, वी. एस. अस्पताल प्रबंधन बोर्ड के सदस्य के रूप में भी सेवा दी। वे जीपीसीसी के प्रवक्ता भी रहे।

राष्ट्रीय स्तर तक काम किया बदरुद्दीन शेख ने

निर्वाचित नेता के रूप में भले ही बदरुद्दीन शेख का कार्यक्षेत्र बेहरामपुरा वॉर्ड तथा अहमदाबाद महानगर पालिका रहे हों, परंतु उन्होंने सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्र में महानगर से लेकर राज्य व राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कार्य किया। बदरुद्दीन शेख को केन्द्र की यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने ख़्वाजा साहब दरगाह समिति – अजमेर शरीफ का उपाध्यक्ष बनाया। शेख वर्ष 2005 में प्रधानमंत्री हज समिति के सदस्य नियुक्त किए गए। तदुपरांत बदरुद्दीन शेख अहमदाबाद स्थित गुजरात विश्वविद्यालय (GU) के सेनेट सदस्य (1979-80), सिंडीकेट सदस्य (1990-93), एनएसयूआई-गुजरात के महासचिव (1984-86), जीपीसीसी अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष (1992-95) तथा रूस में 1985 में आयोजित 12वें विश्व उत्सव में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी रहे। बदरुद्दीन शेख मुस्लिम ख़ुजा फ़रोस जमात-गुजरात के अध्यक्ष तथा अहमदाबाद मुस्लिम ग्रेजुएट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी थे।